आलापुर अम्बेडकर नगर। विकास खण्ड जहांगीरगंज के ग्राम पंचायत कल्यानपुर अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय इशहाकपुर को सहबुद्दीनपुर में मर्जर किए जाने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। सूचना के बाद सैकड़ों ग्रामीण विद्यालय परिसर पहुंच गए और प्रधानाध्यापक को बंधक बना लिया। घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।
प्रधानाध्यापक ने जैसे ही खंड शिक्षाधिकारी को सूचना दी, तत्काल प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अजय पांडेय को मौके पर भेजा गया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था। आक्रोशित ग्रामीणों ने एसडीआई के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और इस निर्णय के लिए खंड शिक्षाधिकारी को जिम्मेदार ठहराते हुए मर्जर के फैसले को मनमाना करार दिया।
ग्राम प्रधान एवं ग्रामीणों ने बताया कि 30 जून को हुई बैठक में विद्यालय में छात्र संख्या 50 थी, जबकि वर्तमान में प्रेरणा ऐप पर यह संख्या 51 दर्शाई गई है। उनका कहना है कि वास्तव में विद्यालय में 55 छात्र अध्ययनरत हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार केवल उन्हीं विद्यालयों का मर्जर किया जाना चाहिए, जिनकी छात्र संख्या 50 से कम हो। लेकिन एसडीआई जहांगीरगंज ने नियमों को ताक पर रखते हुए विद्यालय को सहबुद्दीनपुर में मर्ज कर दिया।
ग्राम प्रधान की अगुवाई में सैकड़ों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा, जिसमें विद्यालय को मर्जर न किए जाने की मांग की गई है। इस ज्ञापन पर ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी कराए गए हैं, जो जन आक्रोश की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।
इस संबंध में जब खंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार पांडेय से बात की गई तो उन्होंने कहा कि शासन के आदेश पर कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को दूसरे विद्यालयों से संबद्ध किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मर्जर के लिए कोई लिखित गाइडलाइन नहीं है, यह प्रक्रिया शासन स्तर पर लिए गए निर्णयों के तहत की जा रही है।
ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन प्रशासन के समक्ष बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या जनभावनाओं को दरकिनार कर शिक्षा से जुड़े ऐसे निर्णय लेना उचित है? अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।