◆ आईसीयू स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया सील, आईपीडी पर पहले ही लगी है रोक
अयोध्या। साकेतपुरी स्थित निर्मला हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर इन दिनों इलाज से ज्यादा अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आई एक पोस्ट से शुरू हुआ मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। आरोप है कि गलत इंजेक्शन के ओवरडोज के बाद मरीज को रेफर किया गया और रास्ते में उसकी मौत हो गई। मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और जांच शुरू हुई।
16 दिसंबर को गठित निरीक्षण टीम जब अस्पताल पहुंची तो इलाज की जगह लापरवाही का पूरा पैकेज मिला। अस्पताल में न कोई एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद था और न ही भर्ती मरीजों से जुड़े कोई अभिलेख। यानी इलाज चल रहा था, पर कागजों में मरीज ही नहीं थे। इस “नवाचार” से प्रभावित होकर विभाग ने तत्काल अस्पताल की आईपीडी सुविधा बंद कर दी और नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी।
इसके बाद 17 दिसंबर को एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि अस्पताल के बेसमेंट में नियमों को ताक पर रखकर आईसीयू चल रहा है। निर्देश मिले कि इसे तुरंत बंद किया जाए। देर रात 10:50 बजे जब टीम दोबारा निरीक्षण को पहुंची तो अस्पताल में इलाज तो दूर, केवल गार्ड शिव प्रताप यादव ही मिले, मानो पूरा अस्पताल उन्हीं के भरोसे चल रहा हो।
अंततः जनहित और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बेसमेंट में संचालित आईसीयू को सील कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि आगे विधिक कार्रवाई जारी है। फिलहाल अस्पताल की हालत देखकर इतना तय है कि यहां इलाज से पहले नियमों को भर्ती करने की सख्त जरूरत थी।