अयोध्या। निषाद समाज के आरक्षण को लेकर गलतफहमी फैलने पर समाज के पदाधिकारियों ने बैठक कर स्थिति स्पष्ट की। समाज के अध्यक्ष श्याम लाल निषाद और निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष आसाराम निषाद ने संयुक्त रूप से कहा कि निषाद समाज के अधिकारों पर भ्रामक जानकारी दी जा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि अब तक समाज को उसका पूरा संवैधानिक हक नहीं मिल पाया है।
श्याम लाल निषाद ने कहा कि मझवार जाति संविधान की अनुसूचित जाति सूची में 53वें क्रम पर दर्ज है, और इसके पर्यायवाची निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप, धुरिया आदि जातियां लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से पहचानी जाती रही हैं।
जिलाध्यक्ष आसाराम निषाद ने बताया कि 1961 तक यह समाज अनुसूचित जाति वर्ग में था, लेकिन 1991 में मंडल आयोग की सिफारिश के बाद 17 जातियों को ओबीसी वर्ग में डाल दिया गया। इससे समाज को आरक्षण और संवैधानिक लाभों से वंचित होना पड़ा, जिसका असर बच्चों की शिक्षा, नौकरी और उन्नति पर पड़ा है। नेताओं ने मांग की कि समाज को गुमराह करने वालों पर रोक लगाई जाए और निषाद समाज को उसका वास्तविक अधिकार वापस मिले।