अम्बेडकर नगर। मालीपुर थाना क्षेत्र के कांदीपुर गांव में जमीन विवाद के एक मामले में एक हाथ से दिव्यांग युवक सुयश मिश्रा की गिरफ्तारी और शांति भंग की आशंका में जेल भेजे जाने से प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे न केवल संवेदनहीन कार्रवाई बताया है, बल्कि मौलिक अधिकारों और संपत्ति के अधिकार के हनन का भी आरोप लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांदीपुर निवासी सुयश मिश्रा का अपने चाचा अवधेश कुमार मिश्रा सहित अन्य पक्ष के साथ संयुक्त खतौनी की जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। आरोप है कि बिना विधिवत बंटवारे के ही विपक्षी पक्ष द्वारा आवास निर्माण शुरू कर दिया गया, जिसका सुयश ने विरोध किया। इस दौरान पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही, क्योंकि कभी निर्माण की अनुमति दी गई तो कभी उसे रोका गया।
बताया जाता है कि सुयश मिश्रा ने उपजिलाधिकारी न्यायालय में बंटवारे का वाद दायर किया था, जबकि इससे पूर्व वह सिविल न्यायालय में भी मामला दर्ज करा चुके थे। सोशल मीडिया पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी वायरल होने के बाद तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। हालांकि बाद में सुनवाई के बाद बिना बंटवारे के ही रोक हटा ली गई, जिसके बाद विपक्षी पक्ष ने पुनः निर्माण शुरू कर दिया।
पीड़ित का आरोप है कि उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए निर्णय की प्रमाणित प्रति समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें नकल मिल सकी। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में वाद दायर करने की प्रक्रिया शुरू की।
इसी बीच, विवादित जमीन पर दोबारा निर्माण शुरू होने पर सुयश मिश्रा की पत्नी बच्चों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठ गईं। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस सक्रिय हुई और सर्विलांस के माध्यम से सुयश मिश्रा तथा उनके रिश्तेदार सौरभ मिश्र को पकड़कर मालीपुर थाने लाया गया। वहां से दोनों को उपजिलाधिकारी न्यायालय भेजा गया, जहां से उन्हें शांति भंग की आशंका में जेल भेज दिया गया।
इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन था, तब प्रशासन को निष्पक्षता बरतते हुए निर्माण कार्य पर रोक बनाए रखनी चाहिए थी। वहीं एक दिव्यांग व्यक्ति के साथ इस तरह की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
उधर, जमानत प्रार्थना पत्र को लेकर भी आरोप है कि उसे न तो स्वीकार किया गया और न ही खारिज, बल्कि लंबित रखा गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
थानाध्यक्ष स्वतंत्र कुमार मौर्य ने बताया कि मंगलवार को पत्रकारों का एक दल गांव पहुंचकर विवादित भूमि का निरीक्षण करेगा, जिसके बाद राजस्व विभाग आगे की कार्रवाई करेगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन निष्पक्षता दिखाते हुए पीड़ित को न्याय दिलाता है या नहीं।