◆ सायरन बजाती गाड़ियां व पुलिस के बूटों की आवाज तोड़ रही थी सन्नाटा
◆ हर आदमी के मन में एक सवाल आखिर हो क्या गया
◆ सुबह स्टालों से अखबार गायब, हर जगह बौखलाहट का आलम
अयोध्या। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन कहे जाने वाले आपातकाल की घोषणा पूर्व 25/26 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी के अनुशंशा पर हुई थी। यह पहला मौका था जब देश में आंतरिक व सियासी कारणों से आपातकाल लागू हुआ था। देर रात तक सड़कों पर चहल पहल देखकर घरों में सोये लोग सुबह जागे तो उनके लिए माहौल चौकाऊ था। सड़कों पर सन्नाटा पसरा था सायरन बजाती गाड़ियों की आवाजाही व गश्त कर रही पुलिस व पीएससी की टुकड़िया लोगों का कौतूहल बढ़ा रही थी। हटो बचों के माहौल के बीच लोग सुबह उठकर चौराहे, तिराहे पहुंचे तो मंजर बदला बदला सा था। क्या क्यों और कैसे आदि सवाल फजाओं में तैर रहे थे। हर कोई एक दूसरे से हालात के बारें में जानकारी करना चाह रहा था।
