अयोध्या। जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल के तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद के 11 विकास खंडों की 114 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित करने पर सहमति व्यक्त की गई।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संदीप कुमार शुक्ला ने बताया कि पहले चरण में विभिन्न विकास खंडों से 114 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया था। इन ग्राम पंचायतों का सत्यापन एडी पंचायत, एसटीएस-एसटीएलएस और मेडिकल कॉलेज के चिकित्साधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा किया गया। निर्धारित मानकों के आधार पर जांच के बाद सभी ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित करने की अनुशंसा की गई।
उन्होंने बताया कि चयनित ग्राम पंचायतों में से 95 को कांस्य, 14 को रजत और 5 ग्राम पंचायतों को स्वर्ण श्रेणी के लिए चिन्हित किया गया है। बैठक के दौरान टीबी रोग के लक्षण, इससे बचाव तथा उपचार की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
राज्य स्तर से आए प्रतिनिधि डॉ. रजनीकांत ने ‘निक्षय मित्र’ योजना के तहत टीबी मरीजों को पोषण पोटली उपलब्ध कराने की व्यवस्था और उसके महत्व पर प्रकाश डाला। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी मुक्त ग्राम पंचायत घोषित करने के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं। इनमें प्रति हजार आबादी पर कम से कम 30 बलगम जांच, एक या उससे कम मरीज, 85 प्रतिशत उपचार सफलता दर, 60 प्रतिशत यूडीएसटी, 50 प्रतिशत डीबीटी तथा निक्षय मित्र की ओर से कम से कम एक पोषण पोटली उपलब्ध कराना शामिल है।
बैठक के अंत में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जिला क्षय रोग अधिकारी को निर्देश दिया कि टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों से संबंधित रिपोर्ट जिलाधिकारी एवं जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष के साथ ही राज्य क्षय रोग अधिकारी को शीघ्र भेजी जाए। बैठक में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पी.के. गुप्ता, डीपीसी अनंत प्रताप सिंह, डीपीटीसी रमनीश मिश्रा, सभी टीबी यूनिट के एसटीएस-एसटीएलएस, डीईओ रामानुज, वरिष्ठ सहायक शिवकुमार और विवेक कुमार सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।