अयोध्या । तेजी से बदलती जीवनशैली और असंतुलित खानपान के चलते बीपी और डायबिटीज जैसी बीमारियां आम होती जा रही हैं। इन रोगों से निपटने के लिए राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज ने उपचार के साथ देसी डाइट मॉडल को अपनाया है, जिसका असर मरीजों में सकारात्मक रूप से दिखाई देने लगा है।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में बीपी और शुगर के मरीजों को दवाओं के साथ मोटे और अंकुरित अनाज को भोजन में शामिल करने की सलाह दी जा रही है। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 250 से 300 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, जिनमें लगभग 10 से 15 प्रतिशत मरीज डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित होते हैं। ऐसे मरीजों पर यह देसी डाइट प्रयोग के तौर पर लागू किया गया है।
मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेन्द्र वर्मा के अनुसार मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो और सांवा में फाइबर की मात्रा अधिक होती है और इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इससे शुगर धीरे-धीरे बढ़ती है और नियंत्रण में रहती है। इन अनाजों में मैग्नीशियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सहायक होते हैं।
उन्होंने बताया कि मोटे अनाज पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं, जिससे व्यक्ति आवश्यकता से अधिक भोजन नहीं करता और बैड कोलेस्ट्रॉल में भी कमी आती है। वहीं अंकुरित अनाज जैसे चना, मूंग और मेथी के सेवन से शरीर में विटामिन सी और डी की मात्रा बढ़ती है, जिससे ग्लूकोज का उपयोग बेहतर तरीके से होता है।
डॉ. वर्मा के अनुसार अंकुरित अनाज फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जो ब्लड शुगर और भूख दोनों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनमें पोटैशियम अधिक और सोडियम कम होने के कारण ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है। साथ ही इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स डायबिटीज के मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रहे हैं।