अयोध्या । मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या इस वर्ष नौवें दीपोत्सव पर एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में है। दीपोत्सव की परंपरा उस क्षण से जुड़ी है जब भगवान श्रीराम चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे और नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली और दीपोत्सव अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान बन गया है।
राम की पैड़ी और घाटों पर इस बार 26 लाख दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजकों के अनुसार, यह संख्या नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर सकती है। दीपों की कतारें न केवल आस्था और श्रद्धा का प्रतीक होंगी, बल्कि अंधकार पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश भी देंगी। इस दीपोत्सव में पहली बार अयोध्या के 41 प्रमुख मठ–मंदिरों को सजाया जाएगा। हनुमानगढ़ी, दशरथ महल, कनक भवन, कौशलेश कुंज, अशर्फी भवन और दिगंबर अखाड़ा जैसे मंदिर रंगीन रोशनी और झालरों से आलोकित होंगे। लगभग एक हजार झालरों में लाखों बल्बों की जगमगाहट से रामनगरी का दृश्य अद्वितीय होगा। दीपोत्सव केवल दीपों की सजावट तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें रामायण से जुड़ी सांस्कृतिक झांकियां, रामलीला और धार्मिक अनुष्ठान भी होंगे। आयोजन में देश–विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होंगे, जिससे यह उत्सव अध्यात्म और संस्कृति का भव्य संगम बन जाएगा।