राज्यपाल ने कहा कि आज की पीढ़ी का यह दायित्व है कि आने वाले भविष्य में सभी क्षेत्रों के युवा अपना अहम योगदान दे। शिक्षण संस्थान द्विस्तरीय शिक्षा का आदान प्रदान करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्र-छात्राओं को मल्टीपल विषय चुनने की आजादी है। इससे हम अपने विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में प्रशिक्षित कर सकते है। विश्वविद्यालय स्तर पर यह तय किया जाए कि विद्यार्थियों की रूचि को बढ़ावा देने के लिए नए नए प्रयोग किए जाए। राज्यपाल ने कहा कि राम हमारे आदर्श है जो हमारे जीवन में चरित्र के निर्माण में सहायक है। भगवान राम का जीवन चित्रण जनमानस को शिक्षा देता है। कि हमें सामान्य तौर पर भेद-भाव से दूर रहना होगा। उन्होंने कहा कि शबरी का चरित्र हमें क्या सिखाता है। इस पर विचार करना चाहिए। एक दूसरे से सीखना ही जीवन है। समारोह में कुलाधिपति ने खेल पर जोर देते हुए कहा कि खेल बच्चों के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज समाज में बच्चों को खेलने से मना करने की धारणा पनप रही है। जबकि बच्चों को इससे मना करना उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में बाधा डालना है। सात साल के बच्चों का अस्सी से नब्बें प्रतिशत विकास हो जाता है। यह शोधों से पता चला है कि बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए खेल आवश्यक है। राज्यपाल ने शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं को बताया कि यह वर्ष महारानी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म ज्योति का उत्सव मना रहा है। विश्वविद्यालयों को इस पर व्यापक चर्चा कर महारानी होल्कर के योगदान को समझना चाहिए। कुलाधिपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शोध कार्यों के मूल्यांकन के लिए वैश्विक स्तर पर कार्य करना होगा। तभी हम उच्च गुणवत्ता को प्राप्त कर सकेंगे। तभी शिक्षण संस्थानों को नैक मूल्यांकन राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय का मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके। इससे हमारी विश्व रैकिंग में सुधार होगा।
समारोह की मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत संचालित समस्त पाठ्यक्रमों के शैक्षणिक परिणाम संतोषजनक और विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायक सिद्ध हुए हैं। इसके तहत भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से संबंधित विषय-वस्तुओं को पाठ्यक्रमों में समाहित किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को न केवल आधुनिक ज्ञान प्राप्त हो, बल्कि वे अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें।
समारोह में कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल ने विश्वविद्यालय की विकास यात्रा का विवरण प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान व सामाजिक योगदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थी उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अंतर्गत इत्र निर्माण कृषि एवं अन्य संबंधित क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर के छात्र-छात्राएं देश के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों न्यायिक सेवाओं राजनीतिक क्षेत्र शोध व शैक्षिक संस्थानों बैंकिंग सेवा भारतीय सेवा एवं निजी क्षेत्रों के उद्योगों में इसके अतिरिक्त विदेशों में भी अपनी सेवाएं दे रहे है। विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 21 स्वर्णिम, 33 रजत वह 57 कांस्य पदक हासिल किए हैं। अनुभूति एक प्रयास के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने छात्रों को विभिन्न आश्रमों से जोड़ा है जिससे युवा वर्ग के समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित होने के साथ-साथ सेवा भाव भी जागृत हो सके। कुलपति ने बताया कि गत वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर शिक्षकों व विद्यार्थियों द्वारा योग शपथ लेकर विश्व कीर्तिमान स्थापित करने में योगदान दिया गया जिसके लिए राजभवन द्वारा विश्वविद्यालय को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
कुलपति ने बताया कि अयोध्या की पौराणिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत के संरक्षण एवं संबंध की दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2017 से निरंतर योगदान दिया जा रहा है। वर्ष 2024 के दिव्या दीपोत्सव में विश्वविद्यालय के 30 हजार छात्रों व शिक्षकों द्वारा पावन सरयू के 55 घाटों पर 25 लाख 12 हजार 585 दीप प्रज्वलित कर लगातार सातवीं बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया गया।