◆ एसआईटी जांच कर रही, दूध का दूध-पानी का पानी होगाः मुख्यमंत्री
◆ मुख्यमंत्री ने रुदौली विधानसभा क्षेत्र में राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय व चिकित्सालय समेत 378 करोड़ रुपये से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास
अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र प्रकरण पर समाजवादी पार्टी व कांग्रेस को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को नकारने वाले, रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले उपदेश दे रहे हैं। अयोध्या को अपमानित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। अयोध्या के बारे में समाचार पत्रों से जो जानकारी मिली, उसके बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर हमने एसआईटी जांच बैठाई है। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। एसआईटी की रिपोर्ट आने तक ऐसी कोई बयानबाजी न हो, जो रामभक्तों की भावनाओं को आहत करती हो। यदि किसी के पास डाक्यूमेंट्री प्रूफ हो तो एसआईटी को उपलब्ध करा दें। सीएम ने रामभक्तों से विनम्र अपील की कि प्रभु राम ने हमें मर्यादित रहने का आचरण दिया है, इसलिए मर्यादा का पालन करना चाहिए। हमारे पूर्वजों ने प्रभु के स्थान के लिए मर्यादित रहते हुए 500 वर्षों तक संघर्ष किया है, 15 दिन और इंतजार कर लें। अगर कोई अपराधी है तो यह सुनिश्चित है कि वह कोई भी हो, बचेगा नहीं।



सीएम ने कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने, राम के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करने, न्यायालय में अधिवक्ता खड़ा करके राममंदिर निर्माण में रोड़े अटकाने, रामभक्तों को अपमानित करने और माफिया की कब्र पर फातिहा पढ़ने वाले उपदेश देना बंद करें। एसआईटी की रिपोर्ट आने तक कतई बयानबाजी न करें, यह जांच को प्रभावित करती है। जांच के बाद किसी भी पक्ष को बात कहनी है तो एसआईटी तैयार रहेगी, लेकिन चरित्र हनन व अयोध्या को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास न करें।
सीएम ने सपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि 2017 के पहले शासन करने वालों ने कामाख्या धाम को नगर पंचायत, सड़कों, विवाह मंडपम, पीएम सूर्यघऱ मुफ्त बिजली व राशन योजना आदि का लाभ नहीं दिया, क्योंकि उनमें संवेदना और इच्छाशक्ति नहीं थी। उनके लिए जनता नहीं, परिवार मायने रखता था। नौकरी, सुविधाएं सिर्फ उनके खानदान को मिलती थीं। जिन्हें कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल से फुर्सत नहीं थी, वे झलकारी बाई की प्रतिमा कैसे लगाते?
सीएम ने कहा कि आजादी की लड़ाई में राष्ट्रनायकों, क्रांतिकारियों ने सर्वस्व न्योछावर किया था। 1857 में स्वतंत्रता के प्रथम समर की लौ बैरकपुर में मंगल पांडेय ने जलाई तो यह चिंगारी मेरठ में धन सिंह कोतवाल के नेतृत्व में आगे बढ़ी। झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। 1858 में धोखे के कारण वह वीरगति को प्राप्त हुईं, अन्यथा देश का इतिहास अलग होता। गोरखपुर के बंधु सिंह का अमर इतिहास है। 1857 के बाद अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों व युवाओं को दबाने का प्रयास किया, लेकिन वे दबे नहीं। देश की आजादी के लिए युवाओं ने गोरखपुर में चौरीचौरा तो काकोरी में ट्रेन एक्शन की घटना को अंजाम किया। आजादी के आंदोलन को नेतृत्व देने वाले नेताओं, स्वाधीनता संग्राम सेनानियों ने जब भी आह्वान किया तो नौजवानों ने उसमें भाग लिया।
