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अकादमिक उत्कर्ष, सामाजिक सरोकार और लोक कला संरक्षण का केंद्र बन रहा अवध विश्वविद्यालय : कुलपति

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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। मंगलवार को स्वामी विवेकानंद सभागार में समारोह की पूर्व संध्या पर रिहर्सल आयोजित की गई। इस दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय के अकादमिक विकास, भावी योजनाओं, सामाजिक दायित्वों और दीक्षांत समारोह की तैयारियों की जानकारी दी।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय अकादमिक उत्कर्ष के साथ सामाजिक सरोकार और लोक कला के संरक्षण का केंद्र बन रहा है। डिजिटल सशक्तिकरण और पारदर्शिता की दिशा में विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों की जियो टैगिंग एवं मैपिंग कराई जा रही है। सभी संस्थानों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं की उपाधियां और अंकपत्र डिजीलॉकर पर अपलोड किए जाएंगे, जिससे उन्हें कहीं से भी अपनी शैक्षिक अभिलेख प्राप्त करने में सुविधा होगी।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सहभागिता के लिए गांवों को गोद ले रहा है। प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों में उच्च शिक्षा के प्रति रुचि विकसित करने और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह के मंच से सम्मानित किया जाएगा।


114 मेधावी विद्यार्थियों को मिलेंगे 120 पदक


31वें दीक्षांत समारोह में कुल 114 मेधावी विद्यार्थियों को 120 पदक प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। कुलपति अपने दीक्षोपदेश के माध्यम से विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का संदेश देंगे।

समारोह में राजस्थान के प्रसिद्ध मिट्टी शिल्पकार भग्गालाल कुम्हार को टेराकोटा कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डी.लिट्. की मानद उपाधि प्रदान की जाएगी। उन्होंने पारंपरिक मिट्टी कला को नई दिशा देने के साथ बिना सांचे के देवी-देवताओं एवं लोक देवताओं की प्रतिमाएं और पूजा पट्टिकाएं तैयार की हैं। प्राकृतिक रंगों के प्रयोग तथा कला संग्रहालयों एवं शिल्पग्राम उत्सवों में लाइव प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने नई पीढ़ी और शोधार्थियों को भी इस कला से जोड़ा है। वर्ष 1992 में उन्हें ‘शिल्प सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है।

समाज और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली एक विभूति को विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि से अलंकृत किया जाएगा। वहीं विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के चार उत्कृष्ट शिक्षकों को उनके अकादमिक एवं शैक्षणिक योगदान के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ शिक्षक’ के रूप में सम्मानित किया जाएगा।

दीक्षांत समारोह के दौरान कुलाधिपति द्वारा विश्वविद्यालय के शिक्षकों की शोध पुस्तकों के साथ विश्वविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘अभिव्यक्ति’, वार्षिक प्रतिवेदन, ‘ग्राम प्रभा’ सहित अन्य पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा।


नन्हे कलाकार देंगे पर्यावरण संरक्षण का संदेश


दीक्षांत समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। प्राथमिक विद्यालय के नन्हे बच्चे ‘पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर संदेशप्रद गीत प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा पीएम श्री विद्यालय, मुमताज नगर के विद्यार्थियों की विशेष संगीतमय प्रस्तुति होगी। इसका अंतिम रिहर्सल मंच पर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
कार्यक्रम का मंच संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन दीक्षांत समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
31वें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री संजय श्रीनेत (आईआरएस) होंगे। उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार श्री योगेन्द्र उपाध्याय एवं राज्य मंत्री उच्च शिक्षा श्रीमती रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं विभिन्न समितियों के सदस्य मौजूद रहे।

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