अयोध्या। केंद्रीय बजट 2026–27 में मनोस्वास्थ्य को लेकर किए गए प्रावधानों का विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। बजट में उत्तर भारत में एक नए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड अलाइड साइंसेज (निम्हान्स) की स्थापना तथा रांची और तेजपुर स्थित मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन का प्रस्ताव मनोस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जिला चिकित्सालय के माइंड-मेंटर एवं निम्हान्स फेलो-ट्रेनी डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि वर्तमान समय में आत्महत्या, नशाखोरी, मूड डिसऑर्डर, डिप्रेशन और अन्य मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, जो न केवल चिंता का विषय हैं बल्कि देश के मानव संसाधन विकास में भी बाधा बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश में प्रति घंटे एक छात्र आत्महत्या कर रहा है और वार्षिक आत्महत्या का आंकड़ा लगभग दो लाख के करीब पहुंच चुका है, जो समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान से जुड़ी सेवाओं की कमी को दूर करने के लिए दूसरा निम्हान्स स्थापित करने का बजटीय प्रस्ताव बेहद आवश्यक था। बेंगलुरु में वर्ष 1974 में स्थापित निम्हान्स मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा और रोगी देखभाल के लिए विश्व प्रसिद्ध संस्थान है, जिसे वर्ष 2012 में राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था।
डॉ. मनदर्शन ने बताया कि रांची और तेजपुर स्थित क्षेत्रीय मनोचिकित्सा संस्थानों के उन्नयन, जिला अस्पतालों में आपातकालीन और आघात देखभाल क्षमता में 50 प्रतिशत वृद्धि तथा युवाओं में मानसिक तनाव और आघात के निदान व समाधान से जुड़े प्रावधान बजट को और प्रभावी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि मनोस्वस्थ युवा ही राष्ट्र के विकास की आधारशिला हैं और यह बजट मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाला साबित होगा।