अयोध्या। उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के पुनर्वासन से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वैच्छिक संस्थाओं से अनुदान प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह योजना दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम–2016 के अंतर्गत संचालित है, जिसमें अधिनियम के तहत परिभाषित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया गया है। मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजन इस योजना के दायरे में नहीं आते हैं।
योजना का उद्देश्य शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वासन के माध्यम से दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत स्वैच्छिक संगठनों को सात प्रमुख परियोजनाओं के संचालन के लिए अनुदान प्रदान किया जाएगा। इनमें अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, डे–केयर सेंटर/प्री–प्राइमरी स्कूल, प्राइमरी, जूनियर हाईस्कूल और हाईस्कूल स्तर तक के विशेष विद्यालयों का संचालन, कौशल विकास कार्यक्रम (न्यूनतम दो एवं अधिकतम चार ट्रेड) तथा पाठ्य सामग्री विकास एवं पुस्तकालय संचालन शामिल हैं।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम–2016 के अंतर्गत पंजीकृत वे स्वैच्छिक संस्थाएं, जिन्हें संबंधित क्षेत्र में कार्य का अनुभव है और जो शासन द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं, आवेदन कर सकती हैं। योजना से संबंधित कार्यकारी आदेश, दिशा–निर्देश और आवेदन पत्र का प्रारूप दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट uphwd.gov.in पर उपलब्ध है।
इच्छुक संस्थाओं को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने प्रस्ताव 4 फरवरी 2026 तक संबंधित जनपद के जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी के कार्यालय में जमा करने होंगे। इसके बाद प्रस्तावों को जिलाधिकारी की संस्तुति के साथ 5 फरवरी 2026 तक निदेशालय को भेजा जाएगा।
जिला प्रशासन ने संस्थाओं से समयबद्ध और निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अपील की है, ताकि पात्र दिव्यांगजनों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।