◆ एक दिसंबर को कारसेवकों व परिजनों संग संतोष दुबे करेंगे आयोजन
अयोध्या। श्री रामजन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराए जाने के बाद एक दिसंबर को सवा कोसी रामकोट परिक्रमा की शुरुआत होगी। धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे ने मंगलवार को बताया कि यह परिक्रमा एकादशी के दिन आयोजित की जाएगी, जिसमें रामभक्तों के साथ वे स्वयं भी शामिल होंगे। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए साधुवाद दिया।
प्रेसवार्ता के दौरान संतोष दुबे ने कहा कि ध्वज फहराने का यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अयोध्या की आस्था को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने वाला क्षण होगा। उन्होंने बताया कि परिक्रमा में वे कारसेवकों और उनके परिवारों के साथ शामिल होंगे, जिन्होंने राममंदिर आंदोलन में त्याग और संघर्ष का योगदान दिया है।
संतोष दुबे ने कहा कि रामकोट परिक्रमा सनातन परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है और पौराणिक काल से इसका उल्लेख मिलता है। उन्होंने दावा किया कि परिक्रमा से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में अनुशासन, मर्यादा और समृद्धि का भाव विकसित होता है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक काल में विदेशी शासन और अंग्रेजी शासन दोनों के दौरान इस परंपरा पर कई बार प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था कभी नहीं टूटी।
संतोष दुबे ने कहा कि राममंदिर निर्माण का संघर्ष केवल आंदोलन नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा के पुनर्जागरण का अध्याय था। उन्होंने कहा कि आज जब मंदिर निर्माण संपन्न हो चुका है, तब यह परिक्रमा कारसेवकों के त्याग को सम्मान देने और सनातन धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक बनेगी। परिक्रमा में ‘सीताराम’ नाम जप के साथ भारत को विकसित राष्ट्र और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने का संकल्प लिया जाएगा।
इस दौरान पंडित देवीदीन पांडेय को पहला धर्म सेनानी बताते हुए उनकी प्रतिमा श्रीरामजन्मभूमि परिसर में स्थापित करने की मांग भी उठाई गई। कार्यक्रम में पं. देवीदीन के वंशज दिग्विजय नाथ पांडेय, सिया प्यारे शरण, दीपक सिंह, जयप्रकाश मिश्रा, महंथ हनुमान शरण और रविशंकर पांडेय सहित कई लोग मौजूद रहे।