अयोध्या। राम जन्मभूमि परिसर में भवन निर्माण समिति की बैठक के दूसरे दिन कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक से पहले भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर निर्माण कार्य में लगी संस्थाओं लार्सन एंड टूब्रो (एलएनटी) और टाटा कंसल्टेंसी का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। पहले यह अवधि सितंबर 2025 तक थी, जिसे अब मार्च 2026 तक कर दिया गया है।
मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय समिति की बैठक में कल कई प्रस्ताव पारित किए गए थे, जिन्हें आज की बैठक में विस्तार से रखा गया। अब तक मंदिर निर्माण के लिए करीब 1100 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि कुल खर्च का अनुमान लगभग 1400 करोड़ रुपये लगाया गया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निर्माण पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।
राम मंदिर परिसर की सुरक्षा और सौंदर्यकरण को लेकर भी अहम फैसले हुए। परिसर की बाउंड्री वॉल बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। ईआईएल ने इसके लिए दो बड़े ठेकेदारों को जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों छोर से एक साथ निर्माण कार्य शुरू होगा, जिससे चारदीवारी का काम तेजी से पूरा हो सके।
बैठक में निकास द्वारों की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। तय हुआ कि मंदिर का मुख्य निकास द्वार यात्री सुविधा केंद्र के पास बनाया जाएगा, जहां सामान और जूता रखने की नई व्यवस्था होगी। सुग्रीव किला और अंगद टीला मार्ग से भी निकास का विकल्प तैयार किया जा रहा है। अप्रत्याशित भीड़ की स्थिति में गेट नंबर-3 को भी निकास द्वार के रूप में उपयोग किया जाएगा।
मंदिर का गेट नंबर-11 निर्माण की अंतिम अवस्था में है और इसका संचालन 10 अक्टूबर से शुरू कर दिया जाएगा। इसी तर्ज पर गेट नंबर-3 का भी विकास किया जाएगा। तीन प्रमुख गेटों का नामकरण वरिष्ठ साधु-संतों के नाम पर किया जाएगा। सभी द्वारों का निर्माण और सौंदर्यकरण दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।