अंबेडकरनगर। मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद आखिरकार पांचवें दिन जिला प्रशासन हरकत में आया। ग्रामसभा खेंवार के धरपपुर गांव को जाने वाली सड़क के किनारे कई दिनों से मरी मुर्गियां फेंकी गई थीं। चारों ओर फैली दुर्गंध से ग्रामीणों और राहगीरों का जीना मुश्किल हो गया था। संक्रमण फैलने का खतरा भी गहरा रहा था, मगर जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहे।
शुक्रवार को जिला पशुचिकित्सा अधिकारी जांच के लिए मौके पर पहुंचे। लेकिन उनका गैर-जिम्मेदाराना बयान ग्रामीणों के आक्रोश का कारण बन गया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि जब यहां मुर्गियां फेंकी गई थीं, तभी आपको मुकदमा दर्ज कराना चाहिए था। इस बयान से नाराज ग्रामीणों ने सवाल खड़ा किया कि अगर हर जिम्मेदारी जनता पर ही डाल दी जाएगी तो फिर प्रशासन की भूमिका क्या है।
ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई की जाती तो मरी मुर्गियां और उनके अवशेष मौके पर मिलते, जिससे असली वजह का पता चलता। लेकिन लापरवाही के चलते न केवल सबूत मिट गए, बल्कि गांव में बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं