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राममंदिर चढ़ावा चोरी: मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस, रिमांड पर टिन्नू-मनीष से गहन पूछताछ

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◆ वारदात के मास्टरमाइंड, चोरी की कुल रकम और बंटवारे के नेटवर्क पर पूछे जा रहे सवाल


◆ सीसीटीवी, डिजिटल साक्ष्य और इससे पहले कस्टडी में लिए गए आरोपियों के बयानों से कराया जा रहा आमना-सामना


अयोध्या। राममंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए जांच को निर्णायक मोड़ देने में जुटी है। विवेचना का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चढ़ावा चोरी का पूरा खेल रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव संचालित कर रहे थे या फिर इनके पीछे कोई और बड़ा चेहरा भी शामिल था। इसी कड़ी में पुलिस चोरी की कुल रकम, उसके बंटवारे की व्यवस्था और लंबे समय तक बिना पकड़े चोरी को अंजाम देने वाले पूरे तंत्र की परतें खोलने का प्रयास कर रही है।

विशेष न्यायालय से 39 घंटे की कस्टडी रिमांड मिलने के बाद शनिवार की सुबह आठ बजे पुलिस ने आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष कुमार यादव को अपनी हिरासत में लिया। दोनों से सीओ अयोध्या एवं मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में लगातार गहन पूछताछ की जा रही है। मनीष यादव इससे पहले गणना कक्ष की सीसीटीवी फुटेज में नोटो को छिपाते दिख चुका है। सीसीटीवी में जो संदिग्ध गतिबिधियों सामने आई थी। उसमें सबसे ज्यादा अविनाश व मनीष नोटो को छिपाते दिखाई दिए थे।

पूछताछ के दौरान पुलिस अब तक विवेचना में जुटाए गए सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों का एक-एक कर सत्यापन कर रही है। आरोपियों से सीसीटीवी फुटेज, बरामदगी, पूर्व में दर्ज उनके और अन्य आरोपियों के बयान, डिजिटल साक्ष्य तथा दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर सवाल पूछे जा रहे हैं। विवेचक यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि चोरी की योजना किसने बनाई, इसमें किस-किस की क्या भूमिका थी और पूरा गिरोह किस तरह संगठित होकर काम करता था।


साजिश के संचालन को लेकर हो रही है टिन्नू से पूछताछ


सूत्रों के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से पुलिस कथित साजिश के संचालन को लेकर विस्तार से पूछताछ की जा रही है। वहीं मनीष यादव से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि चढावे की रकम को किस प्रकार चुराया जाता था और उसे मंदिर परिसर से बाहर निकालने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था।


चोरी की कुल धनराशि का पता लगाने पर पुलिस का फोकस


पुलिस की पूछताछ का बड़ा फोकस चोरी की कुल धनराशि का पता लगाने पर भी है। विवेचक यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि अब तक कितनी रकम की चोरी हुई, उसका हिसाब किसके पास रहता था और गिरोह के सदस्यों के बीच रकम का बंटवारा किस आधार पर किया जाता था। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि क्या इस पूरे खेल में मंदिर से जुड़े अन्य कर्मचारी या बाहरी लोग भी किसी न किसी रूप में शामिल थे।  सूत्रों के अनुसार पुलिस इससे पहले कस्टडी में लिए गए आरोपियों के बयानों का मिलान टिन्नू और मनीष से पूछे जा रहे सवालों से कर रही है। यदि दोनों के बयान उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य आरोपियों की गवाही से मेल नहीं खाते हैं तो आगे की कार्रवाई उसी आधार पर तय की जाएगी। जांच टीम डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजी रिकॉर्ड के जरिए प्रत्येक तथ्य की पुष्टि करने में जुटी है।

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