अयोध्या। “उत्तरप्रदेशकेवलसांस्कृतिकऔरआध्यात्मिकधरोहरकाकेंद्रहीनहीं, बल्किआर्थिकवराजनीतिकचेतनाकावाहकभीहै।यहीवजहहैकिआजयूपीदुनियाभरकेनिवेशकोंकीपहलीपसंदबनचुकाहै।” — यह उद्गार डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह ने सोमवार को स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित “समर्थउत्तरप्रदेश, विकसितउत्तरप्रदेश 2047” संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व आईएएस राजीवकपूर ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश औद्योगिक शक्ति के रूप में उभरा है। निवेशसारथीप्लेटफार्म ने प्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बना दिया है। मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह ने शिक्षा और कौशल विकास को विकसित प्रदेश का मूल आधार बताते हुए कहा कि “व्यापकसुधारोंसेही 2047 कालक्ष्यहासिलकियाजासकताहै।”
पूर्व कृषि निदेशक डॉ. ए.पी. श्रीवास्तव ने कृषि क्षेत्र की प्रगति पर जोर दिया, वहीं प्रो. आर.एन. राय ने भारत की तेजी से उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डाला। संवाद में कुलानुशासक प्रो. एस.एस. मिश्र ने उच्च शिक्षा में डिजिटल डिवाइड खत्म करने की जरूरत बताई। प्रो. शैलेंद्र वर्मा ने मेकइनइंडियाऔरस्किलइंडिया को मजबूत आधार बताते हुए अधिक कार्य करने की आवश्यकता जताई।
छात्रा श्रजनिकामिश्रा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि “विकसितउत्तरप्रदेश 2047 केलिएलखनऊकोवाणिज्यिकराजधानी, वाराणसीकोआध्यात्मिकराजधानीऔरप्रयागराजकोन्यायिकराजधानी” के रूप में विकसित करना होगा।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. नीलम पाठक ने किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।