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संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के बजाय तथ्यों का सम्मान करे विपक्ष : गिरीश पति त्रिपाठी

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अयोध्या। सर्किट हाउस सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर चुनावी पराजय की खीझ में संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने और जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए। चुनाव हारने के बाद निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना समस्या का समाधान नहीं है।

महापौर ने कहा कि एसआईआर को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर निर्वाचन आयोग स्थिति स्पष्ट कर चुका है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा दोनों निर्वाचन आयुक्तों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि एसआईआर समेत प्रमुख निर्णय आयोग की सहमति से लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि 24 जून 2025 के मूल आदेश से लेकर विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू प्रक्रिया तक निर्णय आयोग की सहमति से लिए गए हैं। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध माना है।

उन्होंने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर उठे विवाद पर कहा कि निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह पत्र आयोग की किसी नीति अथवा एसआईआर से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी से जुड़े प्रशासनिक विषय तक सीमित था। इसी प्रकार फॉर्म-6 को लेकर भी विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आयोग के अनुसार गैर-एसआईआर अवधि में पूर्व निर्धारित नियम ही लागू हैं और प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

महापौर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना विपक्ष की पुरानी राजनीति का हिस्सा रहा है। उन्होंने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने, निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर आरोप लगाने और न्यायपालिका पर दबाव होने संबंधी बयानों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर दिए गए बयानों से देश की संस्थाओं की छवि प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने राफेल सौदे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में कांग्रेस की ओर से “चौकीदार चोर है” जैसे राजनीतिक आरोप लगाए गए। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या को लेकर राहुल गांधी को बाद में अदालत में खेद व्यक्त करना पड़ा था। महापौर ने कहा कि राजनीतिक आरोपों और न्यायिक निष्कर्षों के बीच अंतर रखा जाना चाहिए।

महापौर ने बालाकोट एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सैन्य अभियानों पर भी राजनीतिक बयानबाजी की गई। उन्होंने तवांग झड़प का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी द्वारा भारतीय जवानों की पिटाई किए जाने संबंधी बयान पर सेना और सरकार ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा के विषयों पर राजनीतिक विमर्श तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विपक्ष कभी ईवीएम, कभी निर्वाचन आयोग, कभी सुप्रीम कोर्ट और कभी अन्य संस्थाओं पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास करता है। लोकतंत्र में संस्थाओं की आलोचना का अधिकार है, लेकिन आरोप तथ्यों पर आधारित होने चाहिए।


तथ्यों के आधार पर बात रखे विपक्ष : रोली सिंह


जिला पंचायत प्रशासक रोली सिंह ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और एसआईआर जैसे विषयों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय आधिकारिक तथ्यों को जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग अपना स्पष्टीकरण दे चुका है और लोकतंत्र में मतदाता की भागीदारी तथा निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया प्रभारी अमित कुमार मिश्र मौजूद रहे।

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