आलापुर, अम्बेडकर नगर। जिस वर्दी को जनता की सुरक्षा की ढाल माना जाता है, वही वर्दी जब ठगों की संरक्षक बन जाए तो कानून की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र से सामने आया मामला पुलिस महकमे के भीतर चल रहे काले खेल की एक बानगी बन गया है, जहां डायल 112 पर तैनात दो सिपाही ठगी के खेल में सीधे तौर पर शामिल पाए गए।
मामला 13 जनवरी 2026 का है। गोरखपुर निवासी एक व्यक्ति को सस्ते सोने का झांसा देकर दो लाख रुपये की ठगी की गई। सौदा तय होने के बाद पीड़ित को जो बैग सौंपा गया, उसमें सोना नहीं बल्कि नकली नोट निकले। ठगी का एहसास होते ही पीड़ित जब आरोपियों के पीछे भागा, तभी बिना नंबर की बाइक से मौके पर पहुंचे डायल 112 के सिपाही आदर्श यादव और अनिल यादव। आरोप है कि दोनों ने कानून का डर दिखाकर पीड़ित को चुप कराने की कोशिश की और ठगों को सुरक्षित निकालने का रास्ता दे दिया।
पीड़ित की तहरीर के बाद जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे खाकी की असल तस्वीर सामने आती चली गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दोनों सिपाही केवल मौके पर मौजूद ही नहीं थे, बल्कि ठगी के पूरे खेल में उनकी भूमिका संदिग्ध और सक्रिय थी। मामला जब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया।
अपर पुलिस अधीक्षक श्यामदेव ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच के आदेश दिए। जांच में आरोप प्रमाणित होने पर दोनों सिपाहियों को तत्काल निलंबित करते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस मामले में मुख्य आरोपी प्रमोद कुमार सिंह पहले ही जेल जा चुका है, जबकि दूसरा आरोपी वीरेंद्र वर्मा फरार है, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
यह घटना केवल एक ठगी का मामला नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां कुछ वर्दीधारी कानून के रक्षक नहीं, बल्कि अपराध के साझेदार बन बैठे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सक्रिय और सख्त अधिकारियों के सर्कल में भी इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा टूटना स्वाभाविक है।
फिलहाल पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच का दावा कर रहा है और यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अपराध चाहे वर्दी में हो या बिना वर्दी, कानून की गिरफ्त से कोई नहीं बचेगा। मगर सवाल यह है कि ऐसे कितने चेहरे अब भी वर्दी की आड़ में कानून को चुनौती दे रहे हैं?