Home Ayodhya/Ambedkar Nagar अयोध्या संस्कृत के साथ कंप्यूटर कोड भी समझें विद्यार्थी: राजनाथ सिंह

संस्कृत के साथ कंप्यूटर कोड भी समझें विद्यार्थी: राजनाथ सिंह

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◆ यूपी के विद्यालयों में वैदिक गणित की पढ़ाई शुरू कराने का मुख्यमंत्री से करेंगे आग्रह


अयोध्या। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच किसी तरह का विरोध नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के साथ आधुनिक ज्ञान-विज्ञान में भी दक्ष बने। विद्यार्थी संस्कृत के श्लोक समझने के साथ कंप्यूटर कोड पढ़ने और नई तकनीक को समझने की क्षमता भी विकसित करें। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य का निर्माण करना होगा।

रक्षा मंत्री सोमवार को रानोपाली स्थित उदासीन ऋषि आश्रम में आयोजित गुरु पर्व समारोह और संत सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। आश्रम पहुंचने पर संतों की समाधियों पर पूजन-अर्चन किया। उन्होंने नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी किया।


स्कूलों में वैदिक गणित की पढ़ाई पर जोर


राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में वैदिक गणित पढ़ाई जाती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में भी वैदिक गणित की शिक्षा शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस संबंध में आग्रह करेंगे।

उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का व्यापक आधार है। वेद, उपनिषद, दर्शन, व्याकरण, आयुर्वेद, गणित, ज्योतिष, साहित्य और न्याय जैसी ज्ञान परंपराएं संस्कृत से जुड़ी रही हैं। इसलिए संस्कृत शिक्षा को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।


आधुनिकता का अर्थ केवल तकनीक या अंग्रेजी नहीं


रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक होने का मतलब केवल नई तकनीक का इस्तेमाल करना या अंग्रेजी बोलना नहीं है। आधुनिक सोच का वास्तविक अर्थ बदलती परिस्थितियों और नई चुनौतियों को समझने की क्षमता विकसित करना है। उन्होंने कहा कि नारायण संस्कृत महाविद्यालय से ऐसे विद्यार्थी निकलें, जो न्याय और मीमांसा जैसे विषयों का अध्ययन करने के साथ आधुनिक समाज की समस्याओं को भी समझ सकें।


संत और गुरु की भूमिका पर रखे विचार


राजनाथ सिंह ने संत और गुरु की भूमिका को व्यक्ति के आंतरिक विकास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि संत व्यक्ति को भीतर की शांति का अनुभव कराते हैं, जबकि गुरु उस शांति तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। दोनों का उद्देश्य मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान और भ्रम से स्पष्टता की ओर ले जाना है।

उन्होंने कहा कि उदासीनता का अर्थ संसार से विमुख होकर भाग जाना नहीं, बल्कि सांसारिक मोह से मुक्त होकर समाज की सेवा करना है। अयोध्या को उन्होंने केवल भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि भारतीय चेतना और संस्कृति का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या अपने प्राचीन गौरव की ओर आगे बढ़ रही है और इसमें संत समाज का योगदान महत्वपूर्ण है।

राजनाथ सिंह ने उदासीन ऋषि आश्रम के महंत डॉ. भरत दास महाराज, संतों, ब्रह्मचारियों, कर्मचारियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार जताते हुए आश्रम की निरंतर प्रगति की कामना की। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय सहित विधायक, पूर्व सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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