Home Uncategorized भगवान सदैव भक्त के प्रेम के वशीभूत – अतुल कृष्ण भारद्वाज

भगवान सदैव भक्त के प्रेम के वशीभूत – अतुल कृष्ण भारद्वाज

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा अंगद टीला पर आयोजित श्रीराम कथा चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को रामकथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि अयोध्या विश्व की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी है। इक्ष्वाकु वंश के पृथु, मांधाता, दिलीप, सगर, भगीरथ, रघु, हरिश्चंद्र जैसे प्रतापी इक्ष्वाकु वंश के राजाओं ने अयोध्या पर राज्य किया। चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ, श्रीराम जैसे प्रतापी राजाओं ने अयोध्या से विश्व का मार्गदर्शन किया। विपरीत परिस्थितियों में आनंद से रहने वाला वैरागी ,संयासी है। अंहकार पतन का कारक है, अहंकार से मुक्त व्यक्ति ही घर परिवार और समाज को उच्च शिखर पर आसीन करता है। आज भी हम अंग्रेजों की संस्कृति से बंधे है, शिक्षा में अंग्रेजों की मानसिकता साफ दिखता इससे मुक्त होने के लिये आज पूरी दुनिया को रामायण को अनुसरण करने की आवश्यकता है। रामायण साक्षात संविधान है।

उन्होंने कहा कि आज का युवा पाश्चात्य सभ्यता के भंवर में फंसा हुआ है। उसे राम कृष्ण सीता के साथ भारतीय सभ्यता से मतलब नहीं है। उन्होंने माताओं से आग्रह कि यदि माताएं चाहें तो युवा पाश्चात्य सभ्यता से अलग हो सकता है। सभी माताओं से आग्रह किया कि गर्भवती माताओं के चिन्तन, मनन, खान-पान, पठन-पाठन रहन-सहन का बच्चे पर अत्यन्त प्रभाव पडता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान माताओं को भगवान का सुमिरन करना चाहिए। साथ ही साथ सात्विक भोजन व चिन्तन आदि करना चाहिए। उन्होंन कहा कि निरगुण से सगुण भगवान सदैव भक्त के प्रेम के वशीभूत रहते हैं, भक्तों के भाव पर सगुण रूप लेते हैं।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेशचंद्र, ट्रस्ट महासचिव चम्पतराय, हनुमान गढ़ी के सरपंच महंत रामकुमार दास, महामंडलेश्वर प्रेमशंकर दास,धर्माचार्य संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी, प्रचारक गोपाल, शरद शर्मा, रास बिहारी मिश्र, गुलसन महाराज, संघ प्रचारक किशन आदि ने मानस पूजन कर आरती उतारी।

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