✍️ मुकेश पांडेय की कलम से
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार व अयोध्या नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी हैं )
कैंपटी फॉल की शीतल जलधारा में स्नान, प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का आनंद और पहाड़ों के बीच बिताए गए अविस्मरणीय क्षणों को अपनी स्मृतियों में संजोने के बाद हमारा काफिला पुनः मसूरी नगर की ओर बढ़ चला। पहाड़ों की घुमावदार सड़कों पर चलते हुए बार-बार मन पीछे छूटे कैंपटी फॉल की ओर लौट जाना चाहता था। ऐसा लग रहा था मानो प्रकृति हमें अपनी गोद से इतनी जल्दी विदा करने के लिए तैयार ही न हो। लेकिन यात्रा का अपना अनुशासन होता है और उसी का पालन करते हुए हम पहाड़ों की रानी मसूरी के सबसे प्रसिद्ध आकर्षण ‘माल रोड’ की ओर बढ़ते रहे।
शाम के लगभग चार बजे हमारा काफिला मसूरी के प्रसिद्ध माल रोड बाजार के निकट पहुंच गया। उस समय मौसम अत्यंत सुहावना था। हल्की ठंडी हवा चल रही थी और सूर्य पश्चिमी पर्वतों की ओर धीरे-धीरे ढल रहा था। उसकी सुनहरी किरणें सामने दिखाई दे रही पर्वत श्रृंखलाओं पर इस प्रकार बिखर रही थीं, मानो किसी चित्रकार ने अपनी तूलिका से पहाड़ों को स्वर्णिम रंगों से सजा दिया हो।
माल रोड पर निजी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था। इसलिए सभी वाहन निर्धारित पार्किंग स्थल पर खड़े करने के लिए भेज दिए गए। वाहन चालकों को वहीं प्रतीक्षा करने के निर्देश दिए गए और तय हुआ कि हम सभी लोग पैदल माल रोड का भ्रमण करेंगे तथा निर्धारित समय पर पार्किंग में पहुंचकर हरिद्वार के लिए प्रस्थान करेंगे। वाहनों से उतरते ही सभी साथियों के चेहरे पर अलग ही उत्साह दिखाई दे रहा था।
इतिहास, प्रकृति और पर्यटन का अद्भुत संगम
