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भावनाओं को दबाने के बजाय व्यक्त करें, मानसिक स्वास्थ्य के लिए संगीत भी है लाभकारी : डॉ. आलोक मनदर्शन

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अयोध्या। सरायरासी स्थित आरएन पब्लिक स्कूल में आयोजित मेंटल हेल्थ फॉर ऑल विषयक शिक्षकों की कार्यशाला में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य सत्य प्रकाश श्रीवास्तव ने की।

डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि मानसिक रूप से मजबूत होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति कभी दुखी, परेशान या क्रोधित न हो। उन्होंने कहा कि भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें उचित तरीके से व्यक्त करना जरूरी है। लंबे समय तक भावनाओं को दबाकर रखने से मानसिक तनाव, अवसाद, घबराहट और अत्यधिक क्रोध जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि संगीत मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। संगीत सुनने से मस्तिष्क के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं, जिससे तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है। तेज लय वाला संगीत उत्साह बढ़ाता है, जबकि धीमा और मधुर संगीत तनाव कम करने तथा मन को शांत रखने में सहायक होता है।

डॉ. मनदर्शन ने बताया कि संगीत के प्रभाव से डोपामाइन, सेरोटोनिन, एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे “हैप्पी हार्मोन” सक्रिय होते हैं, जो मनोदशा को बेहतर बनाने और भावनाओं को संतुलित रखने में मदद करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और विद्यार्थियों के भावनात्मक विकास पर भी विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

कार्यशाला में विद्यालय के सभी शिक्षकों ने भाग लिया और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

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