◆ अयोध्या वासियों को मिला मनोकामना की अधिष्ठात्री का दिव्य आशीर्वाद
✍️ मुकेश पांडेय की कलम से
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार व अयोध्या नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी हैं )
मां चंडी देवी का दर्शन कर जब हम सभी रोपवे के माध्यम से नीचे पहुंचे, तब तक सांझ धीरे-धीरे अपने आगोश में हरिद्वार को समेटने लगी थी। पहाड़ों के पीछे ढलता सूर्य गंगा की धारा पर सुनहरी आभा बिखेर रहा था। सभी साथियों के चेहरे पर माता चंडी के दर्शन का संतोष स्पष्ट दिखाई दे रहा था, लेकिन यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सामने था, मां मनसा देवी का दर्शन।
देवी दर्शन में हमारा मार्गदर्शन कर रहे विकास तिवारी जी ने समय का ध्यान रखते हुए सभी से कहा, “यदि अभी चलेंगे तो आराम से माता के दर्शन भी हो जाएंगे और उसके बाद हर की पैड़ी की विश्वविख्यात गंगा आरती भी समय पर देख सकेंगे।” उनकी बात सभी को उचित लगी और हमारा काफिला हरिद्वार के दूसरे प्रमुख सिद्धपीठ मां मनसा देवी मंदिर की ओर बढ़ चला।
मां मनसा देवी का मंदिर शिवालिक पर्वतमाला के बिल्व पर्वत की चोटी पर समुद्र तल से लगभग 1,050 मीटर (करीब 3,450 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह हरिद्वार के तीन प्रमुख सिद्धपीठों में से एक है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं के पास दो मार्ग हैं। पहला, लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग, जिसमें सामान्यतः 45 मिनट से एक घंटे का समय लगता है। दूसरा, रोपवे, जो कुछ ही मिनटों में श्रद्धालुओं को पर्वत की चोटी तक पहुंचा देता है। हमने भी रोपवे का ही चयन किया।
