अयोध्या। राजा मोहन मनूचा गर्ल्स पीजी कॉलेज में आयोजित मनोआघात जागरूकता माह के समापन अवसर पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यशाला में वक्ता डॉ. आलोक मनदर्शन ने बताया कि लगातार नकारात्मक खबरों, वीडियो और रील्स के संपर्क में रहने से व्यक्ति पर परोक्ष मनोआघात (विकैरियस ट्रामा) का प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना, हमला या प्राकृतिक आपदाओं से आकस्मिक आघात उत्पन्न होता है, जबकि युद्ध, आपदा या सामाजिक संघर्ष सामूहिक आघात का कारण बनते हैं। पारिवारिक विवाद, धोखा या घरेलू हिंसा संबंधों से जुड़े मनोआघात को जन्म देते हैं।
उन्होंने बताया कि बार-बार होने वाला तनाव या लंबे समय तक चलने वाली समस्याएं भी मानसिक आघात की श्रेणी में आती हैं। इसके अलावा असुरक्षित माहौल और भावनात्मक उपेक्षा में पले-बढ़े बच्चों में विकासात्मक आघात देखने को मिलता है।
डॉ. मनदर्शन के अनुसार मनोआघात की प्रतिक्रिया दो प्रकार की होती है—अति-उत्तेजना और मंद-उत्तेजना। अति-उत्तेजना में व्यक्ति संघर्ष या पलायन की स्थिति में रहता है, जबकि मंद-उत्तेजना में व्यक्ति स्तब्ध हो जाना या प्रतिक्रिया न दे पाना जैसी स्थिति में पहुंच सकता है।
उन्होंने बताया कि मनोआघात के दुष्प्रभावों में घबराहट, अनिद्रा, भय, दुःस्वप्न, अवसाद, स्मृति से जुड़ी समस्याएं और व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण शामिल हैं। ऐसे मामलों में उचित परामर्श, उपचार और पुनर्वास के माध्यम से स्थिति में सुधार संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. मंजूषा मिश्रा ने की। संयोजन प्रो. सुषमा पाठक तथा संचालन डॉ. ज्योतिमा सिंह ने किया। कार्यक्रम में छात्राओं व शिक्षकों की उपस्थिति रही।