Wednesday, June 24, 2026
Homeअयोध्या समाचार विशेषयात्रा वृतांत- भाग सात - वापसी की राह पर आस्था, अपनापन और...

यात्रा वृतांत- भाग सात – वापसी की राह पर आस्था, अपनापन और यादों का कारवां


✍️ मुकेश पांडेय की कलम से

(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार व अयोध्या नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी हैं )


रात्रि विश्राम के बाद रविवार की सुबह हम पुनः रामनगरी अयोध्या लौटने के लिए टनकपुर से रवाना हुए। मन में मां पूर्णागिरि के दर्शन की सुखद स्मृतियां थीं और यह संतोष भी कि कठिन चढ़ाई के बावजूद यात्रा सफल रही। पहाड़, जंगल, श्रद्धा और संघर्ष से भरे इन दो दिनों ने जीवन की अमूल्य यादों में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

यात्रा वृतांत के बीच यह बताना आवश्यक है कि टनकपुर पहुंचने से पहले हमने उत्तराखंड सरकार में अतिरिक्त सचिव (उद्योग) के पद पर कार्यरत अपने गुरु श्री लक्ष्मीनारायण पांडेय जी के सुपुत्र श्री उमेश नारायण पांडेय जी को दूरभाष पर अपने ठहरने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने पूरे मनोयोग से हमारी यात्रा को सुगम बनाने के लिए आवश्यक प्रबंध कराया। इस संपूर्ण यात्रा में अनेक लोगों का अपनापन हासिल हुआ। विशेष रूप से श्री उमेश नारायण पांडेय जी का योगदान उल्लेखनीय रहा। उनसे सशरीर तो मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन दूरभाष पर वार्ता तनावमुक्त बनाए हुए थी। उनके आत्मीय सहयोग और मार्गदर्शन ने हमारी यात्रा को अधिक सहज और व्यवस्थित बनाया। उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए हमने मां पूर्णागिरि से यही प्रार्थना की कि भविष्य में फिर कभी इस पावन धाम में आने का सौभाग्य प्राप्त हो और अधिक समय लेकर इस आध्यात्मिक स्थल की दिव्यता का अनुभव किया जा सके।


नई इच्छा का जन्म



जैसे ही हमारा वाहन उत्तराखंड से आगे बढ़ते हुए लखीमपुर खीरी जनपद की सीमा में पहुंचा, मन में एक नई इच्छा जाग उठी। रास्ते में पड़ने वाले प्रसिद्ध तीर्थ छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ के दर्शन किए बिना आगे बढ़ना उचित नहीं लगा। शारीरिक थकान अपनी जगह थी, लेकिन भगवान के प्रति श्रद्धा उस पर भारी पड़ रही थी।

मुख्य मार्ग से बाईं ओर मुड़कर हम गोला गोकर्णनाथ पहुंचे। नगर में प्रवेश करते ही विकास कार्यों की रफ्तार और व्यवस्थाओं में आए परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। सड़कें, यात्री सुविधाएं और मंदिर परिसर के आसपास हो रहे कार्य यह संकेत दे रहे थे कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल को अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बनाने के प्रयास जारी हैं। यह देखकर मन में संतोष का भाव उत्पन्न हुआ कि आस्था के केंद्रों के विकास की दिशा में सरकार की ओर से गंभीर पहल की जा रही है।

गोला गोकर्णनाथ का प्राचीन शिव मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थापित शिवलिंग धरातल के भीतर स्थित है और श्रद्धालु ऊपर से जलाभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही घंटियों की मधुर ध्वनि, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की आस्था का वातावरण मन को आध्यात्मिक शांति से भर देता है।

हमने भी श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का जलाभिषेक किया, पूजा-अर्चना की और भगवान गणेश के समक्ष भी नमन किया। मां पूर्णागिरि के दर्शन के बाद भगवान भोलेनाथ के चरणों में शीश नवाने का अवसर मिलना इस यात्रा को और अधिक पूर्णता प्रदान कर रहा था। कुछ समय मंदिर परिसर में बिताकर हमने मन ही मन सभी के सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

RELATED ARTICLES

Most Popular

Ayodhya Samachar
Ayodhya Samachar
Ayodhya Samachar
Ayodhya Samachar
Ayodhya Samachar

Recent Comments