◆ चिंता और तनाव का सीधा असर निद्रा पर
◆ नींद है ‘ब्रेन बैटरी चार्जर’, दो हफ्ते से ज्यादा समस्या हो तो लें परामर्श
अयोध्या। बढ़ती भागदौड़ और तनाव भरी जीवनशैली लोगों की नींद पर भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव के दौरान शरीर में बढ़ने वाला हार्मोन कोर्टिसोल नींद के प्राकृतिक चक्र को प्रभावित करता है। इसके लगातार बढ़े रहने से मूड नियंत्रित करने वाला हार्मोन सेरोटोनिन और नींद के लिए जिम्मेदार मेलाटोनिन कम हो जाते हैं, जिससे स्लीप डिसऑर्डर की समस्या जन्म ले सकती है।

मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या


