अयोध्या। राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित अनियमितता प्रकरण की जांच को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेष जांच दल का गठन कर सराहनीय कार्य किया है और अब जांच में किसी प्रकार की ढिलाई की संभावना नहीं है।
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि एसआईटी के तीनों सदस्य मुख्यमंत्री से आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद अयोध्या पहुंचेंगे और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि मामले का एक पक्ष आपराधिक जांच से संबंधित है, जबकि दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवस्थागत सुधार सुनिश्चित करना है। दोनों पहलुओं पर प्रभावी कार्रवाई से श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर प्रशासन जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग प्रदान करेगा। जिला प्रशासन की ओर से भी जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया गया है। मिश्रा ने निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी जांच की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होना ही जनविश्वास बनाए रखने का सबसे बेहतर माध्यम है।
अंतिम चरण में राम मंदिर परिसर निर्माण, जुलाई तक लौट जाएंगी एजेंसियां
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर परिसर का निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। करीब 90 प्रतिशत निर्माण कार्य ट्रस्ट को हस्तांतरित किया जा चुका है और उससे संबंधित अभिलेख भी सौंप दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी निर्माण एजेंसियां 15 जुलाई तक अपना कार्य समेटकर लौट जाएंगी, जिसके बाद परिसर के संचालन और प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास होगी। उन्होंने ऑपरेशन मैनेजमेंट को अगली बड़ी चुनौती बताया। बैठक में राम कथा संग्रहालय परियोजना पर भी चर्चा हुई। संग्रहालय में 3-डी आधारित मॉक डिस्प्ले की व्यवस्था होगी और इसे दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। संग्रहालय में प्रवेश शुल्क लिया जाएगा या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट करेगा।