Wednesday, March 11, 2026
HomeAyodhya/Ambedkar Nagarअयोध्याअवध विश्वविद्यालय के घाटे के कोर्सेज होंगे बंद

अवध विश्वविद्यालय के घाटे के कोर्सेज होंगे बंद


◆ 10 या इससे कम छात्र संख्या के 30 कोर्सेज में नये सत्र में प्रवेश बंद, जारी हुआ नोटिफिकेशन


◆ 28 मार्च 2025 को विश्वविद्यालय कार्य परिषद ने लिया था निर्णय


अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय की तिरछी नजर अब उन पाठ्यक्रमों पर है जिनमें छात्र संख्या न के बराबर होने से घाटे में चल रहे हैं। ऐसे कोर्सेज में 2025-26 सत्र में प्रवेश बंद कर उनको बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ने 10 छात्रों व इससे कम संख्या वाले कोर्सेज में नये सत्र में प्रवेश न लेने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है।
जिन कोर्सेज को बंद किया जा रहा है वे 2021से चल रहे थे। लेकिन यूनिवर्सिटी ने इनकी समीक्षा कर इन्हें बंद करने का कोई फाइनल निर्णय नहीं किया। पूर्व वीसी रविशंकर सिंह के कार्य काल में 65-70 कोर्सेज सेल्फ फाइनेंस योजना के तहत खोले गए। जिनमें से अधिसंख्य में स्टूडेंट्स की संख्या कम रही या किसी, किसी में कोई प्रवेश नहीं हुए। उस समय भी 30-35 गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति की गई और इनके शिक्षण के लिए संविदा पर 125 के करीब शिक्षकों की नियुक्तियां की गई। यूनिवर्सिटी के सूत्रों के मुताबिक संविदा के शिक्षकों को 12 माह ड्यूटी पर रहना पड़ता है। जिसमें उस समय 43 हजार रू मासिक वेतन मिलता था और अतिथि शिक्षकों को 600 रू घंटे अथवा अधिकतम 28 हजार रू का मानदेय दिया जाता था। वीसी रविशंकर सिंह के बाद जब प्रो मनोज दीक्षित वीसी बने तो गेस्ट फैकल्टी का वेतन बढ़ा कर 800 रू प्रति घंटा अथवा अधिकतम 32 हजार रू कर दिया गया। जबकि जूनियर संविदा शिक्षकों के वेतन 43 हजार रू और सीनियर संविदा शिक्षकों के वेतन को 54 हजार हो गया।
पूर्व वीसी मनोज दीक्षित ने बताया कि उनके कार्य काल में 26 नये सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज शुरू किए गए थे। जिसमें टीचर्स की नियुक्तियां भी की गई। उनका कहना है कि जिसमें से अधिसंख्य चल रहे हैं। बहरहाल जबतक बंद होने वाले कोर्सेज का सेकेंड और फाइनल ईयर का शिक्षण कार्य चलेगा शिक्षकों की नौकरी भी चलती रहेगी।


पहले नहीं की गई समीक्षा 


ऐसे सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज जो 2021 से यूनिवर्सिटी में चल रहे थे उनमें प्रवेश व शिक्षण कार्य की समीक्षा पूर्व में नहीं की गई । अथवा समीक्षा के बाद उनको बंद करने पर निष्कर्ष नहीं निकाला गया। पांच साल तक अनुपयोगी कोर्स पर लाखों का खर्च यूनिवर्सिटी ढोती रही। अब जाकर यूनिवर्सिटी कुलाधिपति व गवर्नर के निर्देश पर यूनिवर्सिटी कार्य परिषद 10 या इससे कम संख्या के पिछले साल के प्रवेश आंकड़े के मुताबिक चयनित 30 कोर्सेज को बंद करने का निर्णय किया गया है।

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