अयोध्या। जमीअत उलमा जिला अयोध्या के तत्वावधान में फैजाबाद चौक पर 77वां गणतंत्र दिवस भव्य और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। वर्ष 2013 से निरंतर आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करना और आपसी भाईचारे का संदेश देना है। इस अवसर पर “आओ अमन के दीप जलाएं” के स्लोगन के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी ने की, जबकि संचालन कारी इरफान अहमद हलीमी ने किया।
मुख्य अतिथि मौलाना क़अब रशीदी कासमी, अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को ध्यान में रखते हुए संविधान निर्माताओं ने विश्व का सबसे उत्कृष्ट भारतीय संविधान बनाया। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन देश को ऐसा संविधान मिला, जो अत्याचार, अन्याय और भेदभाव से मुक्त शासन व्यवस्था की परिकल्पना करता है। उन्होंने बताया कि संविधान की प्रस्तावना में संशोधन को लेकर उच्चतम न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इसमें परिवर्तन नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे संविधान निर्माण का मूल उद्देश्य प्रभावित होगा।
इस्लामिक स्कॉलर मौलाना अहमद सिराज कासमी ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता देश की सबसे बड़ी ताकत है। अंग्रेजों ने फूट डालकर शासन किया, लेकिन जब सभी धर्मों के लोग एकजुट हुए, तब देश को आजादी मिली। आज भी देश की तरक्की के लिए उसी एकता की आवश्यकता है।
पूर्व मंत्री देवनारायण पांडे ने कहा कि गंगा-जमुनी तहजीब भारत की पहचान है और इसे सहेजने के लिए ऐसे आयोजन सराहनीय हैं। मुक्तीजुद्दीन कश्मीर ने कहा कि आजादी की लड़ाई में अनेक महान बलिदानी हुए, जिनमें मौलवी अब्दुल्लाह शाह का नाम प्रमुख है, लेकिन उनके नाम पर किसी वार्ड का न होना दुखद है।
कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही। विशेष रूप से अली सईद, असद बस्तवी, अब्दुल वफा, हाफिज जावेद बस्तवी, सईद ए.सी., जफर इकबाल, मंसूर इलाही, हाजी मोहम्मद अनीस, हाजी मोहम्मद इस्माइल, मोहम्मद ओसामा, तैयब भाई, मुफ्ती अफजाल, मास्टर फुरकान, मास्टर इरशाद, रब्बानी शान भाई, मौलाना अब्दुल वाजिद, तबरेज कमाल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।