जलालपुर, अंबेडकर नगर। जलालपुर नगर क्षेत्र में संचालित एक स्पा सेंटर की वैधता को लेकर प्रशासनिक उदासीनता सवालों के घेरे में आ गई है। शिकायत और जानकारी मिलने के बाद उपजिलाधिकारी मधुमिता सिंह, नायब तहसीलदार उत्कर्ष सिंह, कोतवाल अजय प्रताप यादव समेत प्रशासनिक एवं पुलिस टीम ने स्पा सेंटर पर पहुंचकर जांच की। इस दौरान संचालकों से सेंटर संचालन से संबंधित लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन मौके पर कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
दस्तावेज न मिलने पर प्रशासन की ओर से संचालकों को दो दिन का समय दिया गया। इसी बीच स्पा सेंटर के संचालक और वहां काम करने वाले कर्मचारी सेंटर बंद कर मौके से चले गए। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मौके पर संचालन से संबंधित जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं थे तो सेंटर को तत्काल बंद कर सील क्यों नहीं किया तथा संचालक व कर्मचारियों को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया।
स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि जांच के दौरान प्रशासनिक टीम की मौजूदगी के बावजूद संचालकों और कर्मचारियों को सेंटर बंद कर चले जाने का अवसर कैसे मिल गया। यदि जांच में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे तो कार्रवाई के लिए दो दिन की मोहलत देने का आधार क्या था और इस अवधि में सेंटर के संचालन पर रोक सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
मामले का दूसरा पहलू बाहर से आकर यहां रहने वाले संचालकों और कर्मचारियों के सत्यापन से जुड़ा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि स्पा सेंटर में दूसरे राज्यों से आए लोग काम कर रहे थे। ऐसे में उनके पुलिस सत्यापन और मकान मालिक द्वारा किरायेदारों की सूचना पुलिस को दिए जाने की व्यवस्था का भी सवाल उठ रहा है। यदि सत्यापन नहीं कराया गया था तो संबंधित मकान मालिक और सेंटर संचालकों के विरुद्ध पुलिस स्तर से क्या कार्रवाई की गई, यह भी स्पष्ट नहीं है।
यदि दस्तावेज नहीं थे तो प्रशासन ने तत्काल कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की? सेंटर बंद होने के बाद संचालकों और कर्मचारियों के चले जाने से जांच की आगे की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है।