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सावन सप्तमी पर शीतला माता का व्रत, अष्टमी को बासी भोजन का भोग देने की परंपरा

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अयोध्या। सावन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि पर महिलाओं ने शीतला माता का व्रत रखकर विधिविधान से पूजा-अर्चना की। इस दिन महिलाओं द्वारा माता शीतला को शुद्धता और शीतलता का प्रतीक मानते हुए व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शीतला माता पुत्रों की हर प्रकार से रक्षा करती हैं।

सप्तमी के दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और घर में एक दिन पहले ही भोजन तैयार कर लेते हैं। अगले दिन यानी अष्टमी तिथि को शीतला माता को बासी भोजन (जिसे लोकभाषा में बासौरा कहा जाता है) का भोग लगाया जाता है। इस भोग में पूड़ी, चने, हलवा, लौंग आदि शामिल होते हैं। मान्यता है कि माता शीतला को ताजा गर्म भोजन नहीं चढ़ाया जाता।

इस अवसर पर कई स्थानों पर मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी और महिलाओं ने शीतला माता की विधि विधान से पूजा की। भगवान श्री राम की कुलदेवी माता बडी देवकाली के महंत सुनील पाठक ने बताया कि व्रत करने वाली महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतानों की रक्षा के लिए माता से प्रार्थना की। इस व्रत को करने से शीतलता और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है, साथ ही जीवन में रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद भी मिलता है।

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