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वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर भाजपा ने घटिया राजनीति की मानसिकता दिखाई – डा विजय शंकर तिवारी

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अम्बेडकर नगर। भारत माता के अमर सपूत और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,महान साहित्यकार श्रद्धेय बंकिम चन्द्र चटर्जी जी ने आजादी की लड़ाई में भारत वासियों में जोश भरने के लिए बंग दर्शन पत्रिका में वंदे मातरम् गीत लिखकर आजादी की लड़ाई में नया जोश भर दिया था लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में उसी वंदे मातरम् गीत पर चर्चा करते हुए चुनावी भाषण दिया और खुद को राष्ट्रवादी कहनेवाले चर्चा की शुरुआत में वंदेमातरम् का गान तक नहीं किया।

डा विजय शंकर तिवारी सदस्य , उप्र कांग्रेस

उप्र कांग्रेस सदस्य डा विजय शंकर तिवारी ने कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू ने जन गण मन को राष्ट्रगान तथा वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत घोषित किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज संसद में पहले वक्ता थे राष्ट्रगीत तक नहीं गा सके. डा विजय शंकर तिवारी ने कहा कि यदि आज वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री लोकसभा में वंदेमातरम् राष्ट्रगीत गाते तो आज लोकसभा ही नहीं पूरा देश वंदे मातरम् उनके साथ गाता लेकिन प्रधानमंत्री इस ऐतिहासिक क्षण को भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू जी की निंदा करने, कांग्रेस को नीचा दिखाने तथा भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति की नुमाइश करने में व्यर्थ गंवा दिया

डा विजय शंकर तिवारी ने कहा कि जिस पत्रिका और पत्रकारिता ने आजादी के दीवानों में नया जोश भर दिया उसी पत्रकारिता पर मोदी सरकार ने संकट खड़ा कर दिया भाजपा और भाजपा के नीति निर्धारकों का विवादों से पुराना नाता है आज जब दिल्ली में भाजपा की डबल इंजन सरकार सांस लेने के लिए जिंदा रहने के लिए साफ हवा और पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रही और पूरे देश में हवाई अड्डों पर अफरा तफरी मची हुई है तो समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए मोदी सरकार ने वंदे मातरम् का दुरूपयोग किया यह घोर निंदनीय है।

पीसीसी सदस्य डा विजय शंकर तिवारी ने कहा कि चुनाव और चुनावी रणनीति को साधने के लिए भाजपा के नीति नियंता किसी भी हद तक गिर सकते हैं आज लोकसभा कार्यवाही में पूरे देश ने इसको देखा और महसूस किया कि जिस पार्टी के पूर्वजों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को बावन सालों तक नहीं अपनाया और राष्ट्रगान को राष्ट्रीय अपमान कहते हुए आधुनिक महाकवि श्रद्धेय रवीन्द्र नाथ टैगोर जी का अपमान किया वह सत्ता किसी तरह भले ही हासिल कर ले वह जनहितैषी कभी नहीं हो सकती वह जनता के दिल की हाय जरूर पायेगी।

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