अयोध्या । पूर्वांचल के चर्चित अपराधी भानू प्रताप सिंह की पहचान उसके मारे जाने के बाद ही तारुन ब्लॉक के घूरीटीकर गांव में सामने आई। करीब दस माह से गांव में रह रहे भानू प्रताप को स्थानीय लोग एक सामान्य व्यक्ति और क्लीनिक संचालक के सहयोगी के रूप में जानते थे। उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी न तो ग्रामीणों को थी और न ही उसके संपर्क में रहने वाले अधिकांश लोगों को।
जानकारी के अनुसार, भानू प्रताप अपनी पत्नी के साथ गांव में किराए के मकान में रह रहा था। उसकी पत्नी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी होने के कारण क्षेत्र में एक क्लीनिक संचालित कर रही थी, जहां भानू भी सहयोग करता था। ग्रामीणों का कहना है कि उसका व्यवहार सहज और मिलनसार था। वह लोगों की छोटी-मोटी मदद भी करता था, जिससे किसी को उस पर संदेह नहीं हुआ।
रविवार रात वह रोज की तरह घर के बाहर सोया था। इसके बाद वह कब वहां से निकला और कई किलोमीटर दूर महाराजगंज थाना क्षेत्र के एमीघाट तिराहे तक कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी परिवार या आसपास के लोगों को नहीं है। सोमवार सुबह एसटीएफ मुठभेड़ में उसके मारे जाने की खबर मिलने के बाद गांव में हलचल मच गई और लोगों को उसकी वास्तविक पहचान का पता चला।
भानू प्रताप की पत्नी ने बताया कि उनकी शादी करीब दो वर्ष पहले हुई थी और उनका छह माह का एक बच्चा है। उनके अनुसार, पति ने कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया जिससे किसी आपराधिक गतिविधि का आभास हो। उन्होंने कहा कि रात में वह सामान्य रूप से भोजन कर सोए थे, लेकिन सुबह उठने पर घर पर नहीं मिले। बाद में मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी हुई।
गांव के लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति को वे अब तक ‘डॉक्टर साहब’ के नाम से जानते थे, उसके अपराध जगत से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद सभी हैरान हैं। मुठभेड़ के बाद गांव में पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।