Home Ayodhya/Ambedkar Nagar अयोध्या संगीत की धुन में ऊर्जा और सुकून, कानफाड़ू डीजे साउंड से सेहत...

संगीत की धुन में ऊर्जा और सुकून, कानफाड़ू डीजे साउंड से सेहत को खतरा

0

तेज आवाज से बढ़ सकता है रक्तचाप और हृदय की धड़कन, सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ माइग्रेन मिर्गी का भी खतरा


अयोध्या। संगीत जहां मस्तिष्क को सक्रिय कर ऊर्जा, सुकून और सकारात्मकता का एहसास करा सकता है, वहीं अत्यधिक तेज आवाज स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। त्योहारी सीजन में डीजे की तेज आवाज को लेकर जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

चिकित्सक डॉ. आलोक मनदर्शन के अनुसार संगीत मस्तिष्क के सुनने वाले हिस्से ऑडिटरी कॉर्टेक्स, भावनाओं से जुड़े अमिग्डाला और लिम्बिक सिस्टम, स्मृति केंद्र तथा शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले मोटर कॉर्टेक्स को सक्रिय करता है। इससे मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ती है और संगीत के साथ पुरानी यादें भी जीवंत हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि तेज बीट और उत्साहवर्धक संगीत मस्तिष्क में डोपामिन के स्राव को बढ़ा सकता है। वहीं धीमा शास्त्रीय संगीत या हल्का इंस्ट्रूमेंटल संगीत तनाव कम करने में सहायक हो सकता है। संगीत से जुड़े अध्ययनों में दर्द और भावनात्मक तनाव पर भी इसके प्रभाव की बात सामने आई है।

हालांकि डॉ. मनदर्शन ने चेताया कि संगीत और अत्यधिक शोर में बड़ा अंतर है। लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से कानों की संवेदनशील कोशिकाओं और श्रवण तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। अत्यधिक शोर तनाव बढ़ाकर रक्तचाप और हृदय गति पर भी असर डाल सकता है।

उन्होंने कहा कि तेज आवाज के साथ डीजे की चमकदार और तेज रोशनी का संयोजन कुछ लोगों में सिरदर्द, माइग्रेन और अन्य तंत्रिका संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। मिर्गी से पीड़ित लोगों में तेज चमकती रोशनी विशेष रूप से सावधानी का विषय है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version