अयोध्या। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की तत्परता और कुशल उपचार से एक युवती की जान बचा ली गई। 26 वर्षीय सुनीता, पत्नी सूरज, निवासी कासगंज को 26 फरवरी को अचेत अवस्था में इमरजेंसी में लाया गया था। परिजनों के अनुसार युवती ने 25 फरवरी की रात लगभग 8 बजे फेनोबार्बिटोन (Phenobarbitone) की 60–80 गोलियां खा ली थीं, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. वीरेंद्र वर्मा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। जांच में मरीज को एस्पिरेशन होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद उसे तत्काल आईसीयू में शिफ्ट कर इंट्यूबेट किया गया। चिकित्सकों ने गैस्ट्रिक लैवेज कर एक्टिवेटेड चारकोल दिया और लगातार तीन दिनों तक दो बार फोर्स्ड अल्कलाइन डाययूरेसिस की प्रक्रिया अपनाई।
मरीज की स्थिति में अपेक्षित सुधार न होने पर डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने स्थिति का गंभीरता से मूल्यांकन करते हुए हीमोडायलिसिस कराने का निर्णय लिया। 28 फरवरी को पहला हीमोडायलिसिस किया गया, जिसके बाद मरीज के ग्लासगो कोमा स्कोर (GCS) में सुधार देखा गया। इसके बाद 1 मार्च को दूसरा हीमोडायलिसिस कराया गया। उपचार के बाद मरीज की हालत तेजी से सुधरी और 2 मार्च को उसे पूरी तरह होश में आने के बाद एक्सट्यूबेट कर दिया गया।
चिकित्सकों के अनुसार अब मरीज पूरी तरह सचेत, स्थिर और स्वस्थ है। चिकित्सकीय जांच में स्थिति संतोषजनक पाए जाने के बाद 7 मार्च को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस पूरे उपचार के दौरान डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने लगातार मरीज की स्थिति पर नजर रखी और टीम का मार्गदर्शन किया। उनके नेतृत्व, अनुभव और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण गंभीर हालत में लाई गई मरीज को नया जीवन मिल सका। इस सफल उपचार में डॉ. शशि कुमार वर्मा, डॉ. शशिकांत शुक्ला, डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. शुभम प्रकाश और डॉ. सक्षम भाटिया सहित नर्सिंग स्टाफ, सिस्टर और वार्ड बॉय की टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।