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यौनाकर्षण और प्रेम में अंतर समझना जरूरी, तीन चरणों से गुजरती है ‘लव ट्रेन’ : डॉ. आलोक

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अयोध्या। वैलेंटाइन-डे सप्ताह के अवसर पर जिला पुस्तकालय में किशोरों और युवाओं के लिए ‘यौनाकर्षण और प्रेम का मनोवैज्ञानिक अंतर’ विषय पर जागरूकता व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने कहा कि यौनाकर्षण और सच्चे प्रेम में सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण अंतर होता है, जिसे समझना युवाओं के लिए जरूरी है।

उन्होंने बताया कि आकर्षण की भावना तीन चरणों से गुजरती है। पहले चरण में हार्मोनल बदलाव के कारण यौनाकर्षण (लस्ट) बढ़ता है, दूसरे चरण में डोपामाइन व एंडॉर्फिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन’ आकर्षण और खुशी की अनुभूति कराते हैं, जबकि तीसरे चरण में ऑक्सीटोसिन के कारण भावनात्मक जुड़ाव और स्थिर संबंध (अटैचमेंट) बनता है। सेरोटोनिन संबंधों को स्थायित्व देने में मदद करता है।

डॉ. आलोक ने कहा कि क्षणिक आकर्षण को प्रेम समझ लेने से ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, अवसाद और पढ़ाई-कैरियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए युवाओं को भावनात्मक परिपक्वता के साथ निर्णय लेना चाहिए।

कार्यक्रम का आयोजन जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुमोदन और प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष राजेश तिवारी के संयोजन में हुआ, जिसमें प्रतियोगी परीक्षार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

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