जलालपुर, अंबेडकर नगर। जलालपुर नगर के बसखारी रोड स्थित मछली मंडी के दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थाई दुकान लगाने के लिए निर्धारित स्थान नहीं होने के कारण बीते एक सप्ताह से मछली और मीट का कारोबार करने वाले दुकानदार तहसील, पुलिस विभाग और नगर पालिका के अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। बुधवार को सैकड़ों की संख्या में दुकानदार जलालपुर तहसील पहुंचे और उपजिलाधिकारी से अस्थाई मछली मंडी के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की।
दुकानदारों ने बताया कि जलालपुर से बसखारी रोड पर बड़े पुल के समीप पिछले कई महीनों से मछली मंडी लग रही थी। इसी स्थान पर मछली और मीट की दुकानें लगाकर दर्जनों परिवार अपनी आजीविका चला रहे थे। सावन के पूर्व संबंधित खतौनी धारकों द्वारा उक्त स्थान पर दुकान लगाने से मना कर दिए जाने के बाद दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। इसके बाद से ही दुकानदार स्थाई मंडी के लिए प्रशासन से लगातार गुहार लगा रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से वे जलालपुर तहसील प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और नगर पालिका के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अभी तक स्थाई अथवा अस्थाई रूप से दुकान लगाने के लिए भूमि चिन्हित नहीं की जा सकी है। इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और परिवार के भरण-पोषण को लेकर भी परेशानी बढ़ गई है।
बुधवार को दुकानदारों ने एक बार फिर उपजिलाधिकारी मधुमिता सिंह से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया। दुकानदारों ने मांग की कि मछली मंडी के लिए जल्द से जल्द सरकारी अथवा उपयुक्त भूमि चिन्हित कर अस्थाई दुकानें लगाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही जब तक मंडी के लिए भूमि उपलब्ध नहीं होती, तब तक बड़े पुल के समीप पूर्व निर्धारित स्थान पर ही दुकान लगाने की अनुमति देने की मांग की गई।
दुकानदारों की समस्या सुनने के बाद उपजिलाधिकारी ने जल्द से जल्द अस्थाई मछली मंडी के लिए भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। साथ ही दुकानदारों को बड़े पुल के समीप ही 15 दिनों तक दुकान लगाने की अनुमति प्रदान की गई है। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद दुकानदारों ने राहत की सांस ली।
इस दौरान सभासद देवेश मिश्रा और व्यापार मंडल अध्यक्ष आनंद जायसवाल ने भी दुकानदारों की समस्याओं को उपजिलाधिकारी के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मछली और मीट का कारोबार करने वाले दुकानदार लंबे समय से अपने परिवार का भरण-पोषण इसी व्यवसाय से कर रहे हैं। ऐसे में उनके लिए जल्द से जल्द उपयुक्त स्थान की व्यवस्था किया जाना जरूरी है।