◆ 25 जून तक नालों की सफाई का दावा हुआ ध्वस्त, जलभराव से सड़कें बनी तालाब, घरों-दुकानों में घुसा गंदा पानी
अयोध्या। मंगलवार दोपहर करीब एक घंटे तक हुई तेज बारिश ने नगर निगम की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। बरसात थमने के बाद शहर के कई प्रमुख मार्ग, चौराहे और मोहल्ले घंटों तक पानी में डूबे रहे। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, नालियां उफन पड़ीं और गंदा पानी लोगों के घरों व दुकानों में घुस गया। जलभराव के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा और कई स्थानों पर लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
नगर निगम ने मानसून से पहले 25 जून तक शहर के सभी 21 बड़े, 125 मझोले और 168 छोटे नालों की सफाई पूरी करने का दावा किया था। लेकिन पहली तेज बारिश ने इन दावों की पूरी तरह पोल खोल दी। शहर के अधिकांश इलाकों में जलनिकासी व्यवस्था ध्वस्त नजर आई और नाले ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहने लगे।
गुलाबबाड़ी से रामपथ जाने वाली सड़क पर इतना पानी भर गया कि दुकानों के भीतर तक पानी पहुंच गया। सड़क पर वाहन रेंगते नजर आए, जबकि कई दोपहिया वाहन आधे पानी में डूब गए। देवकाली तिराहे पर जलभराव के कारण लंबा जाम लग गया। चौक क्षेत्र में जल निगम द्वारा सीवर लाइन के लिए खोदी गई सड़कों ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। आधी सड़क पर ही आवागमन संभव होने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
वजीरगंज चेला छावनी में बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया और बाहर खड़े वाहन पानी में डूब गए। फतेहगंज ओवरब्रिज के नीचे एक लेन पूरी तरह जलमग्न रही। रामपथ के कई हिस्सों में घंटों तक पानी जमा रहा। देवकाली रोड पर कब्रिस्तान के पास नाली का गंदा पानी सड़क पर बहने लगा। ऋषिटोला में नालियों का पानी घरों तक पहुंच गया, जबकि फतेहगंज का मुख्य नाला उफनकर सड़क पर बहने लगा। इसके अलावा शहर के अनेक मोहल्लों और गलियों में भी भारी जलभराव की स्थिति बनी रही।
बारिश रुकने के एक-दो घंटे बाद कुछ स्थानों से पानी जरूर उतरने लगा, लेकिन तब तक नगर निगम की तैयारियों की वास्तविकता लोगों के सामने आ चुकी थी। हर वर्ष करोड़ों रुपये नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर खर्च होने के दावों के बावजूद पहली ही तेज बारिश में शहर का डूब जाना नगर निगम की कार्यप्रणाली और दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।