◆ नींद और भूख छोड़कर सट्टेबाजी में डूबे रहते हैं लती लोग, अवसाद से लेकर हिंसा और आत्मघाती प्रवृत्ति तक का बढ़ता है खतरा : डॉ. आलोक मनदर्शन
अयोध्या। ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी का बढ़ता चलन किशोरों और युवाओं को मानसिक बीमारी तथा आर्थिक बदहाली की ओर धकेल रहा है। जुआखोरी केवल आर्थिक नुकसान का कारण नहीं, बल्कि एक गंभीर मनोविकार है। इसे मेडिकल भाषा में कम्पल्सिव गैम्बलिंग कहा जाता है। इस लत से ग्रसित व्यक्ति नुकसान उठाने के बावजूद बार-बार जुआ खेलने के अवसर तलाशता रहता है। क्रिकेट मैच, त्योहारों और अन्य विशेष अवसरों पर यह लत इतनी हावी हो जाती है कि व्यक्ति अपनी नींद और भूख तक की परवाह करना छोड़ देता है। यह जानकारी जिला चिकित्सालय के मन कक्ष में आयोजित जुआखोरी मनोविकार विषयक वार्ता में डॉ. आलोक मनदर्शन ने दी।
मनो परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय अयोध्या
