” दीपों की आभा में सजी हर की पैड़ी, आस्था में डूबा मन “
✍️ मुकेश पांडेय की कलम से
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार व अयोध्या नगर निगम में जनसंपर्क अधिकारी हैं )
मां मनसा देवी के दर्शन के उपरांत हमारा काफिला सीधे हरिद्वार की पहचान विश्वविख्यात हर की पैड़ी की ओर बढ़ चला। संध्या धीरे-धीरे अपने पूरे सौंदर्य के साथ धरती पर उतर रही थी और हमें विश्वास था कि आज मां गंगा की आरती का वह अलौकिक दृश्य देखने का सौभाग्य मिलने वाला है, जिसकी चर्चा वर्षों से सुनते आए हैं। यह हमारे जैसे तमाम साथियों के लिए गंगा आरती का पहला अवलोकन था। सभी साथी इस अवसर को लेकर रोमांचित थे।
हर की पैड़ी पहुंचते ही श्रद्धालुओं का अथाह जनसैलाब दिखाई दिया। देश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालु गंगा आरती के साक्षी बनने के लिए घाटों पर अपने-अपने स्थान ग्रहण कर चुके थे। वातावरण में एक अद्भुत उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा व्याप्त थी। हालांकि भीड़ अधिक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था चुनौतीपूर्ण दिख रही थी। महापौर के सुरक्षाकर्मी अमन सिंह, विनय चौबे ने इस चुनौती को आसान बनाने में भरपूर योगदान दिया।

घाट की ओर बढ़ने से पहले हम लोगों ने स्थानीय पुलिस चौकी के समीप बने एक सुरक्षित स्थान पर अपने जूते-चप्पल उतार दिए। इसके बाद नंगे पांव मां गंगा के पावन तट की ओर चल पड़े। जैसे-जैसे हम घाट की ओर बढ़ रहे थे, वैसे-वैसे मन में श्रद्धा का भाव और गहरा होता जा रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रत्येक कदम हमें केवल गंगा के निकट ही नहीं, बल्कि अपनी सनातन संस्कृति और आस्था के और भी समीप ले जा रहा हो।
भीड़ इतनी अधिक थी कि घाट तक पहुंचते-पहुंचते हमारे अधिकांश साथी अलग-अलग दिशाओं में बिखर गए। प्रत्येक व्यक्ति अपने लिए एक उपयुक्त स्थान खोजने का प्रयास कर रहा था, जहां से आरती का भव्य दृश्य स्पष्ट दिखाई दे सके।
इस बीच माननीय महापौर जी को आयोजकों और स्थानीय व्यवस्था से जुड़े लोगों द्वारा गंगा आरती के मुख्य मंच के समीप ले जाया गया। वहां उन्होंने मां गंगा का विधिवत पूजन-अर्चन किया और समस्त अयोध्यावासियों तथा देश की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजन के उपरांत वे पुनः लौटकर घाट के ऊपर बने पुल के समीप आ गए।