◆ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे सपा नेताओं ने की कार्रवाई की मांग, पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप
अयोध्या। तारुन थाना क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत के मामले में तीन दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने से नाराज परिजनों ने मंगलवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।
मामले ने मंगलवार को उस समय राजनीतिक रंग ले लिया, जब समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद, पूर्व मंत्री आनंद सेन यादव और राम निषाद लोटन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और मृतका के परिजनों से मुलाकात की। सांसद ने परिजनों को मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मृतका के भाई जयप्रकाश यादव ने तारुन थाने के प्रभारी पर धमकाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम नहीं कराने पर मुकदमा दर्ज करने की बात कही गई। परिवार ने समझौते के लिए रकम की पेशकश किए जाने का भी आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि उन्हें आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।
मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय सदस्य आशीष यादव ने आरोप लगाया कि घटना के तीन दिन बाद भी पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने जिले में संचालित निजी अस्पतालों की जांच पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ अस्पतालों में बिना आवश्यक अनुमति के चिकित्सा संबंधी कार्य किए जा रहे हैं।
आशीष यादव ने अस्पताल संचालक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने, अस्पताल को सील करने तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि एफआईआर और कार्रवाई होने तक परिवार पोस्टमार्टम कराने और शव ले जाने के लिए तैयार नहीं है।
21 सितंबर को अस्पताल में भर्ती हुई थी प्रसूता
परिजनों के अनुसार तारुन थाना क्षेत्र के सराय सागर गांव निवासी विश्वास यादव ने अपनी पत्नी अनुराधा यादव को 21 सितंबर को पब्लिक हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। उनका आरोप है कि अस्पताल में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की हालत बिगड़ गई। इसके बाद 23 सितंबर को उसे लखनऊ के चरक हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां 27 सितंबर की रात उसकी मौत हो गई।
परिजनों का दावा है कि इलाज के दौरान करीब 12 लाख रुपये खर्च हुए। उन्होंने अस्पताल संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और क्षतिपूर्ति की मांग की है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले में आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।