आलापुर, अंबेडकर नगर। विकास के तमाम दावों और सरकारी योजनाओं की हकीकत तब उजागर होती है जब आजादी के कई दशक बाद भी कोई गांव बिजली से वंचित रह जाए। ऐसा ही एक मामला आलापुर तहसील क्षेत्र के मकरही गांव के छिटकाहावा पुरवा का है, जहां आज तक बिजली की एक भी किरण नहीं पहुंच सकी है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति को लेकर कई घोषणाएं और निर्देश जारी किए गए हैं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस बात को लेकर सख्त हैं कि हर गांव तक बिजली पहुंचे, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
छिटकाहावा पुरवा में बिजली के खंभे, तार और ट्रांसफॉर्मर तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अब तक विद्युत आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में गांव के निवासी आज भी मोमबत्ती सहारे अंधेरे में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
वहां के लोगों ने बताया कि लालटेन और मिट्टी का तेल अब दुर्लभ हो चले हैं, ऐसे में अंधेरे में रहना उनकी मजबूरी बन गया है। कई बार उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायतें भी की गईं, लेकिन हर बार कोरे आश्वासन ही मिले। जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय गांव का रुख करते हैं और उसके बाद कोई सुध नहीं लेते।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आज भी उनका गांव 21वीं सदी की रोशनी से कोसों दूर है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घरेलू कार्य तक अंधेरे की वजह से बुरी तरह प्रभावित हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल कर उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
छिटकाहावा पुरवा का यह मामला प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन गया है, जो सरकार के “सबका साथ, सबका विकास” के दावों पर सवाल खड़ा करता है।