जलालपुर, अंबेडकर नगर। प्रदेश सरकार जहां एक ओर तालाबों, बंजर भूमि और अन्य सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं जलालपुर तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश और अवमानना नोटिस जारी होने के बावजूद ग्राम गौरा कमाल में तालाब और जिला परिषद की सड़क की भूमि आज तक अतिक्रमण मुक्त नहीं कराई जा सकी है।
मामला जलालपुर तहसील क्षेत्र के गौरा कमाल गांव का है। गांव में स्थित गाटा संख्या 142 राजस्व अभिलेखों में जिला परिषद की सड़क तथा गाटा संख्या 225 तालाब के रूप में दर्ज है। आरोप है कि इन दोनों सरकारी संपत्तियों पर स्थानीय लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिससे सार्वजनिक भूमि का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
गांव निवासी एवं अधिवक्ता संतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने अतिक्रमण हटाने के लिए तहसील से लेकर जिला स्तर तक कई बार शिकायत की, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की।
मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर 2024 को संबंधित अधिकारियों को तालाब और सड़क की भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। आरोप है कि आदेश के बावजूद तहसील प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके चलते अधिवक्ता संतोष कुमार ने न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके बावजूद कई माह बीत जाने के बाद भी न तो तालाब की भूमि खाली कराई गई और न ही सड़क से अतिक्रमण हटाया गया। इससे सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर प्रशासन की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं। अधिवक्ता संतोष कुमार ने एक बार फिर संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायती पत्र देकर तालाब और सड़क की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार जल संरक्षण और सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चला रही है। इसके बावजूद न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में हो रही देरी प्रशासनिक उदासीनता की ओर संकेत करती है। इस संबंध में पूछे जाने पर जलालपुर के उप जिलाधिकारी राहुल कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और न ही कोई न्यायालयीय आदेश उनके संज्ञान में है।