अयोध्या। अनावश्यक चिंता, शंका और वहम में रहना केवल स्वभाव नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकार का संकेत भी हो सकता है। समय रहते इसकी पहचान और उचित मनोपरामर्श से व्यक्ति एंग्जायटी और अन्य मानसिक समस्याओं से राहत पा सकता है। यह बातें डॉ. आलोक मनदर्शन ने पैका सभागार में आयोजित ‘पर्सनालिटीडिसऑर्डरजनितमनोशारीरिकविकार‘ विषयक कार्यशाला में कहीं।
उन्होंने कहा कि कभी-कभी चिंतित या सशंकित होना सामान्य है, लेकिन बिना कारण लगातार चिंता या संदेह में रहना आगे चलकर जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर, पैनिक एंग्जायटी डिसऑर्डर, क्लॉस्ट्रोफोबिया, अगोराफोबिया, ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) और सिजोफ्रेनिया जैसे मानसिक रोगों का रूप ले सकता है। ऐसे लोगों के मन में हर समय नकारात्मक विचार चलते रहते हैं।
उन्होंने बताया कि पैनिक एंग्जायटी अटैक के दौरान तेज धड़कन, घुटन, भारीपन, पेट दर्द, सिर दर्द, ऐंठन, सुन्नपन और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार चिकित्सकीय जांच सामान्य आने के बावजूद मरीज को राहत नहीं मिलती और इंटरनेट पर लक्षण खोजने से उसकी चिंता और बढ़ जाती है।
डॉ. मनदर्शन ने बताया कि पर्सनालिटी टेस्ट के माध्यम से व्यक्ति के व्यवहार और एंग्जायटी की मनोवैज्ञानिक जांच की जाती है। इसके बाद कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) की मदद से स्वस्थ मानसिक सोच विकसित की जाती है, जिसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है। उन्होंने सलाह दी कि यदि किसी व्यक्ति में लंबे समय तक अनावश्यक चिंता, डर या शंका बनी रहे तो उसे मनोपरामर्श अवश्य लेना चाहिए।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों का पर्सनालिटी टेस्ट भी कराया गया। इसमें सीनियर वर्ग में प्रभुयादव तथा जूनियर वर्ग में श्वेताइमानुएल को ‘परिपक्व–व्यक्तित्व‘ अलंकरण से सम्मानित किया गया।