◆ चेस्ट फिजीशियन के दोनों पद खाली, एक ही डॉक्टर पर बढ़ रहा बोझ
अयोध्या। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन चिकित्सकीय व्यवस्था अपेक्षित मानकों पर खरी नहीं उतर रही है। अस्पताल में फिजीशियन के तीन पदों में से केवल एक पर तैनाती है, जबकि चेस्ट फिजीशियन के दोनों पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस कारण मरीजों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है और चिकित्सकों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है।
फिजीशियन की जिम्मेदारी ओपीडी, भर्ती मरीजों और आकस्मिक (ऑन कॉल) चिकित्सा सेवाओं तक फैली होती है। वर्तमान में केवल डॉ. प्रशांत द्विवेदी एकमात्र तैनात फिजीशियन हैं, जिन पर सारी ज़िम्मेदारियाँ केंद्रित हैं। हालांकि कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अरुण प्रकाश तथा पुनर्नियोजित डॉ. नानक सरन भी सहयोग करते हैं, लेकिन फिर भी चिकित्सकीय सेवाओं पर दबाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत है। फिजीशियन की कमी के चलते बाल रोग विशेषज्ञों तक को जरूरत पड़ने पर फिजीशियन की ड्यूटी निभानी पड़ती है। वीवीआईपी दौरे या आपात स्थिति में यह संकट और गहरा जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, कई बार अस्पताल प्रशासन और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों द्वारा उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जिलाधिकारी द्वारा निरीक्षण के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था, जिसके बाद शासन को पत्र भेजने का दावा किया गया, परंतु फिजीशियन की तैनाती अभी भी अधर में है। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. अजय सिंह गौतम ने बताया कि फिजीशियन की कमी का असर यहां की स्वास्थ्य सुविधाओं पर नहीं पड़ रहा है। मरीजों का बेहतर तरीके से इलाज किया जाता है।