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आकाश से इंद्र देव तो धरा पर भक्तों ने किया देवाधिदेव का अभिषेक

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◆ सावन के अंतिम सोमवार को रामनगरी अयोध्या में भक्ति और प्रकृति का अद्भुत संगम


अयोध्या सावन के अंतिम सोमवार को रामनगरी का परिवेश शिव भक्ति में डूबा रहा। आकाश से इंद्रदेव मेघों की धारा बरसा कर , तो नीचे धरती पर भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति  से देवाधिदेव का अभिषेक किया। भीगी हवाओं के बीच भक्तों ने सरयू स्नान कर भोलेनाथ के चरणों में जल अर्पित किया। सावन के आखिरी सोमवार को रामनगरी शिवभक्ति में सराबोर रही। झमाझम बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकी। भोर से ही श्रद्धालु सरयू तट की ओर उमड़ पड़े, जहां स्नान कर उन्होंने प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिरों में देर शाम तक पूजा-पाठ और हर-हर महादेव के जयकारों का सिलसिला जारी रहा।

नागेश्वरनाथ मंदिर के साथ ही राममंदिर और हनुमानगढ़ी में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर फूलों और रंगोली से सजे थे, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो गया। मंदिरों के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिव पूजा हुई, जबकि बाहर श्रद्धालु कतार में अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। भक्तों का कहना था कि सावन का आखिरी सोमवार शिव कृपा पाने का विशेष अवसर होता है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शहर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक टीमें मेला क्षेत्र में तैनात रहीं। भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई, जिससे मुख्य सड़कों पर यातायात नियंत्रित किया जा सके। मेला क्षेत्र में शेड, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की अस्थायी व्यवस्था भी की गई थी।

बारिश के बावजूद मंदिरों और घाटों पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रही। स्थानीय श्रद्धालु श्यामलाल ने बताया कि अयोध्या की फिजा सावन के अंतिम सोमवार को खास रूप से आध्यात्मिक हो जाती है। वहीं, एक अन्य श्रद्धालु रामप्रसाद ने कहा कि शिव भक्ति का यह अनुभव जीवन में अविस्मरणीय रहेगा। श्रद्धा, भीड़ और व्यवस्था के बीच सावन का यह सोमवार अयोध्या में भक्ति की पूर्णता का प्रतीक बन गया।

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