अम्बेडकरनगर। जनपद के ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहचान बनाने वाले ग्राम कबीरपुर कसेरूआ, विकास खंड अकबरपुर निवासी दयाशंकर ने मधुमक्खी पालन के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उद्यान विभाग के सहयोग से एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत शुरू किया गया उनका यह व्यवसाय आज न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गया है।
दयाशंकर ने सीमित संसाधनों के साथ मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी। वर्तमान में वे 500 बॉक्स के माध्यम से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। आधुनिक उपकरणों की मदद से वे प्रतिवर्ष लगभग 500 कुंतल यानी 50 हजार किलोग्राम शुद्ध शहद का उत्पादन कर रहे हैं। यह शहद स्थानीय बाजारों के साथ-साथ लखनऊ और देश की नामी कंपनियों डाबर, हमदर्द और पतंजलि तक पहुंच रहा है, जो इसकी गुणवत्ता का प्रमाण है।
शहद उत्पादन के साथ-साथ दयाशंकर मौनवंश की बिक्री भी कर रहे हैं। उनकी मौनवंश कई कृषि विज्ञान केंद्रों और संस्थानों जैसे महाराजगंज, बलरामपुर, बहराइच, आजमगढ़, मऊ, अमेठी और सुल्तानपुर तक भेजी जा रही है, जिससे अतिरिक्त आय के स्रोत खुले हैं। सभी खर्चों को घटाने के बाद उन्हें सालाना लगभग साढ़े दस लाख रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है।
मधुमक्खी पालन न केवल कम निवेश में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है, बल्कि यह पर्यावरण और कृषि उत्पादन के लिए भी लाभदायक है, क्योंकि मधुमक्खियां फसलों के परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिला उद्यान अधिकारी धर्मेंद्र चंद्र चौधरी ने बताया कि दयाशंकर जैसे किसान जिले को मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में नई पहचान दिला रहे हैं और अन्य किसानों व युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।