Tuesday, July 14, 2026
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स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर आयोग ने की समीक्षा, जनप्रतिनिधियों से लिए सुझाव


अयोध्या। स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण के संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की समीक्षा बैठक मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक में आयोग ने जनपद में पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति तथा स्थानीय निकायों में उनके प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा करते हुए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव प्राप्त किए।

बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह ने की। इस दौरान आयोग के सदस्य संतोष कुमार विश्वकर्मा, बृजेश कुमार, एस.पी. सिंह एवं डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी कृष्णा कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) अरविंद कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, प्रशासक जिला पंचायत सहित सभी खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), ब्लॉक प्रमुख तथा ग्राम पंचायतों के प्रशासक मौजूद रहे।

बैठक में आयोग के अध्यक्ष ने आयोग के गठन के उद्देश्य और कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आयोग स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित तथ्यात्मक एवं अनुभवजन्य अध्ययन कर रहा है, ताकि शासन को निष्पक्ष आधार पर अपनी संस्तुतियां उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार जनपद अयोध्या की कुल जनसंख्या 19 लाख 37 हजार 638 है। इनमें अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 9 लाख 83 हजार 386, अनुसूचित जाति की 4 लाख 74 हजार 966, सामान्य वर्ग की 4 लाख 78 हजार 906 तथा अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 680 है। इस प्रकार जनपद की कुल आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी लगभग 50.75 प्रतिशत है।

बैठक के दौरान आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों और खंड विकास अधिकारियों से अन्य पिछड़ा वर्ग की सामाजिक स्थिति, जनसंख्या तथा स्थानीय निकायों में उनके प्रतिनिधित्व के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। जनप्रतिनिधियों ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपने सुझाव भी आयोग के समक्ष रखे।

आयोग ने कहा कि बैठक में प्राप्त आंकड़ों, तथ्यों और सुझावों का अध्ययन करने के बाद अपनी संस्तुतियां राज्य सरकार को भेजी जाएंगी, ताकि स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।

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